वसई के डीजे जॉनी और डीजे स्किप बने विश्व चैंपियन, 40 साल में पहली बार भारत को स्वर्ण पदक

Anchal Sharma
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आईडीए वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 में इतिहास रचते हुए भारत को दिलाई बड़ी जीत

डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |

मुंबई–पालघर जिले के वसई की पावन धरती से निकले होनहार कलाकारों ने विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। अंतरराष्ट्रीय आईडीए वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 के शोकेस वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए तुशार अखिलेश चौबे उर्फ डीजे जॉनी और रूपेश पंत उर्फ डीजे स्किप ने प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया।यह प्रतियोगिता के 40 वर्षों के इतिहास में पहली बार है जब भारतीय कलाकारों ने विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने अंतरराष्ट्रीय डीजे मंच पर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

वसई की गलियों से विश्व मंच तक डीजे जॉनी का सफर

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत छिपी है। डीजे जॉनी का जन्म वसई में हुआ और वे वर्तमान में वसई पश्चिम के सनसिटी क्षेत्र में निवास करते हैं। उनका मूल निवास उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से जुड़ा है।सीमित संसाधनों के बावजूद लगन, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। वसई की गलियों से शुरू हुआ उनका संगीत सफर आज विश्व के सबसे बड़े मंच तक पहुंच चुका है।

दिल्ली के डीजे स्किप संग बनाई विजेता जोड़ी

डीजे स्किप के नाम से मशहूर रूपेश पंत दिल्ली के निवासी हैं और देश के बहुप्रतिभाशाली संगीत कलाकारों में गिने जाते हैं। डीजे जॉनी और डीजे स्किप की जोड़ी ने भारत का नेतृत्व करते हुए अपनी अनोखी और सशक्त प्रस्तुति से दुनिया भर के दिग्गज कलाकारों को पीछे छोड़ दिया।

बांसुरी और विशेष रूप से तैयार किए गए वाद्य यंत्रों के प्रयोग से सजी उनकी प्रस्तुति ने निर्णायकों को खासा प्रभावित किया और उन्हें शीर्ष स्थान दिलाया।

नौ देशों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा

आईडीए वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 में इटली, पोलैंड, चीन, थाईलैंड, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम और भारत सहित कुल नौ देशों के कलाकारों ने हिस्सा लिया।

कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद भारत ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि पोलैंड दूसरे और थाईलैंड तीसरे स्थान पर रहा।

भारतीय कला और युवाओं के लिए प्रेरणा

यह जीत केवल एक प्रतियोगिता की सफलता नहीं है, बल्कि भारतीय कला, नवाचार और प्रतिभा की वैश्विक पहचान का प्रतीक है। वसई से लेकर पूरे देश के युवाओं के लिए यह उपलब्धि प्रेरणास्रोत बन गई है, जो यह साबित करती है कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर वैश्विक मंच पर भी भारत शीर्ष पर पहुंच सकता है।

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