चित्रकूट: ग्राम लोहदा में चल रही श्रीमदभागवत कथा का छठवाँ दिन आनन्दोत्सव के साथ सम्पन्न हुआ। व्यास पीठ से आचार्य बालकृष्ण भार्गव ने रासलीला का तात्विक भाव प्रगट किया, रासलीला कोई लौकिक नहि अपितु आत्मा से परमात्मा का मिलन ही रासलीला है, जो करोड़ो जन्मों से जीव परमात्मा से मिलने को उद्यत है। प्रभु रासलीला के माध्यम से आत्मा से रमण कर रहे हैं। साथ ही कंस के उद्धार की कथा के माध्यम से जीव के अंदर जो अभिमान बैठा है, उसे भगवान ने नष्ट किया। कंस हमारे हृदय में अहंकार के रूप मे पाया जाता है। जरासंध का आक्रमण मथुरा में कृष्ण के ऊपर सत्रह बार हुआ, इसका तात्पर्य हैं जवानी और बुढापे की संधि, बुढापा जीव पर सत्रह प्रकार से आक्रमण करता है, भगवान कृष्ण जब वृन्दावन मे सबको छोड़कर मथुरा जाते हैं तव वृजवासियो की स्थिति ऐसी होती है जैसे शरीर के बिना देह का कोई मतलब नहीं होता, गोपी उद्धव संवाद नन्द यशोदा, राधा, ग्वाल बाल सखाओं से भगवान का वियोग सुनकर भक्तों के हृदय में भक्ति रूपी धारा प्रवाहित हुई। श्रीकृष्ण वृन्दावन से मथुरा लीला, द्वारिका लीला मे रुक्मिणी विवाह से भक्तों को आनन्दित किया। कथा के आयोजक भाजपा नेता हिन्दू युवा वाहिनी के जिला प्रभारी प्रदीप शुक्ल सभी का आभार प्रगट किया।