हड़ताल से चिकित्सा व्यवस्था लड़खड़ाई, भटकते रहे मरीज

News Desk
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मनीष गर्ग खबर सतना
सतना एकाएक तबीयत खराब हुई तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नागौद पहुंचे। वहां हड़ताल के चलते एलोपैथी के चिकित्सक ही मौजूद नहीं थे। मरीजों की भीड़ लगी थी। मजबूरी में जिला अस्पताल पहुंचे तो यहां भी मरीजों की लंबी कतार लगी थी। एक घंटा इंतजार के बाद भी जब नंबर नहीं आया तो निजी हॉस्पिटल जाना पड़ा। इस तरह की समस्या केवल नागौद निवासी अनुज सिंह नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में मरीजों को झेलनी पड़ी। हालांकि दोपहर बाद हड़ताल समाप्त होने पर जब चिकित्सक काम पर वापस लौटे तो मरीजों ने राहत की सांस ली।

जिला अस्पताल समेत प्राथमिक-सामुदायिक स्वास्थ्य की चिकित्सा व्यवस्था लड़खड़ा गई ओपीडी में आने वाले मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तो ओपीडी में चिकित्सक कक्ष के ताले भी नहीं खुले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की चिकित्सा व्यवस्था आयुष चिकित्सकों के भरोसे रही। जहां केवल सर्दी-जुकाम और बुखार पीड़ितों को इलाज परामर्श दिया गया। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। सामुदायिक में दाखिल गंभीर मरीजों को भी इलाज नहीं मिल पाया। जिला अस्पताल समेत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों का वार्ड में सुबह राउंड ही नहीं हुआ। इससे मरीज पीड़ा से कराहते रहे।
बच्चे-महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान
हड़ताल के दौरान जिला अस्पताल के बाहर बैठे चिकित्सक।
आश्वासन पर हड़ताल स्थगित
चिकित्सकों की हड़ताल के पहले अस्पताल में खाली पड़ी चिकित्सक की कुर्सी व बाहर इंतजार में बैठे मरीज
हड़ताल से सबसे ज्यादा परेशान बीमार मासूम और महिलाएं हुई। परिजन बीमार मासूमों को गोद में लिए इलाज के लिए परेशान होते
रहे। महिलाएं ओपीडी पर्चा कटवाने के बाद चिकित्सकों के इंतजार में बैठी रहीं लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पाया।
स्वास्थ्य केंद्रों में दोपहर बाद भी नहीं पहुंचे
जिला अस्पताल में दोपहर बाद चिकित्सक काम पर लौट आए. इससे मरीजों को राहत मिली। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य
सिविल सर्जन को जाना पड़ा पोस्टमार्टम कराने
केंद्रों में दोपहर बाद भी चिकित्सक काम पर नहीं लौटे, इससे मरीजों को इलाज के लिए दोपहर के बाद भी भटकाव झेलना पड़ा।
मप्र चिकित्सा अधिकारी संघ के प्रवक्ता डॉ एमएस तोमन ने बताया, मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने डीएसीपी एवं प्रशासनिक अधिकारियों की दखलअंदाजी पर हाई पावर कमेटी बनाने का निर्देश दिया है, जिसे निश्चित समय सीमा में निर्णय लेने को आदेशित किया गया है। कमेटी शीघ्र निर्णय लेगी। इस मौके पर डॉ एसपी तिवारी, डॉ सुनील कारख, डॉ प्रवीण श्रीवास्तव, डॉ मनोज शुक्ला, डॉ तरुणकांत त्रिपाठी, डॉ खुश्बू त्रिपाठी, डॉ अमर सिंह, डॉ सुधीर सिंह, डॉ देवेंद्र सिंह, डॉ अभिनव चौरसिया, डॉ देवेश गौतम, डॉ संजीव प्रजापति सहित अन्य मौजूद रहे।
जिलेभर के चिकित्सकों के हड़ताल में होने से पोस्टमार्टम और मेडिकल परीक्षण का कामकाज भी प्रभावित हुआ। इससे पीड़ितों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिला अस्पताल में सुबह पोस्टमार्टम के लिए एक शव पहुंचा लेकिन कोई भी वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद नहीं था। ऐसे में सिविल सर्जन डॉ केएल सूर्यवंशी को खुद मौजूद रहकर पोस्टमार्टम कराना पड़ा।

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