राजेंद्र राठौर
झाबुआ, मंगलवार प्रात से ही माता शीतला की पूजा करने महिलाएं मंदिर पहुंची। जहां महिलाओं ने लंबी कतार में खड़े होकर माता शीतला आशीर्वाद प्राप्त किया। इस पर्व को लेकर महिलाएं रात से ही माता के लिए भोग बनाती हैं और माता शीतला को सुबह पूजा का ठंडा भोग लगाकर माता की पूजा अर्चना करती हैं साथ ही अपने परिवार सहित सभी ठंडी भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं। माता की पूजन मध्य रात्रि से ही शुरू हो जाती है। शहर के शीतला माता मंदिर में मंदिर प्रबंधन द्वारा आकर्षक विद्युत साज सज्जा की गई और श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्था के प्रबंध किए गए।
माता शीतला की पूजा करने से ज्वर ताप और चेचक आदि रोगों से मुक्ति मिलती है। स्कंद पुराण के अनुसार माता शीतला रोगों से बचाने वाली देवी है माता को शीतल जल चढ़ाने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है।
शीतला सप्तमी पर्व को लेकर महिलाओं में काफी उत्साह रहता है मंदिरों में लंबी कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार करती हैं और अपने बच्चों अपने परिवार की खुशहाली की कामना लेकर माता शीतला की पूजा अर्चना करती हैं। शीतला माता की पूजा के दिन घर में झूला नहीं जलता है इसलिए बासी भोजन करने की परंपरा है।
शास्त्रों के अनुसार शीतला माता की आराधना मुख्य रूप से गर्मी के मौसम में की जाती है। शीतला माता की पूजा करने से मनुष्य को जहां एक तरफ आध्यात्मिक रूप से मजबूती मिलती है वहीं दूसरी तरफ मौसम के चलते शरीर में होने वाले रोग विकार भी मां की पूजा से दूर हो जाते हैं ठंडक प्रदान करने वाली माता शीतला पर्यावरण को स्वच्छ रखने की प्रेरणा देती है। धार्मिक रूप के साथ-साथ शीतला माता के इस पर्व का वैज्ञानिक महत्व भी है इस दिन से गर्मी की विधिवत शुरुआत होती है।
महिलाओं ने माता शीतला से स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की

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