झुंझुनू,20 अक्टूबर। राजस्थान में झुंझुनू जिले के मंडावा विधानसभा उपचुनाव के लिए सोमवार 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है तथा प्रत्याशी घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। मंडावा में हो रहा उपचुनाव राजनीतिक दृष्किोण से बहुत महत्वपूर्ण है। एक तरफ प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है दूसरी तरफ दिसंबर 2018 में पहली बार मंडावा विधानसभा चुनाव जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी कि इस उपचुनाव में कड़ी अग्नि परीक्षा है कि वह अपनी सीट को बरकरार रख पाती है या नहीं।
मंडावा विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का रुझान अधिकतर कांग्रेस की तरफ ही रहता आया है। यहां से कांग्रेस के रामनारायण चौधरी 6 बार विधायक रहे हैं। 1985 में कांग्रेस की सुधा देवी विधायक रह चुकी है। 2008 में रामनारायण चौधरी की पुत्री रीटा चौधरी कांग्रेस से विधायक रह चुकी है। 2018 के विधानसभा चुनाव में नरेन्द्र कुमार खीचड़ को जीता कर मंडावा सीट पर भाजपा ने पहली बार जीत का खाता खोला था। कांग्रेस ने रीटा चौधरी को मैदान में उतारा है जो कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे रामनारायण चौधरी की पुत्री है। रीटा चौधरी 2008 से 2013 तक 5 साल के कार्यकाल में मंडावा से विधायक रह चुकी है। उनके पिता राम चौधरी विधायक, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, विधानसभा के उपाध्यक्ष, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व कई मुख्यमंत्रियों के साथ कैबिनेट मंत्री रहे थे।
कांग्रेस ने 2013 के विधानसभा चुनाव में तब कि मौजूदा विधायक रीटा चौधरी का टिकट काटकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ चंद्रभान को अपना प्रत्याशी बनाया था। उस चुनाव में रीटा चौधरी ने कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा था। निर्दलीय प्रत्याशी नरेंद्र कुमार खीचड़ उस चुनाव में विजय हुए थे। रीटा चौधरी दूसरे स्थान पर रही थी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा.चन्द्रभान की जमानत जब्त हो गयी थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर से रीटा चौधरी को अपना प्रत्याशी बनाया था। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने निर्दलीय विधायक नरेंद्र कुमार खीचड़ को अपना प्रत्याशी बनाया था। उस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नरेंद्र कुमार खीचड़ ने कांग्रेस की रीटा चौधरी को 2346 मतों से हरा दिया था।
2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र कुमार कीचड़ के झुंझुनू से लोकसभा सांसद बन जाने के कारण मंडावा विधानसभा में उपचुनाव हो रहा है। इस उपचुनाव में कांग्रेस ने रीटा चौधरी को व भारतीय जनता पार्टी ने झुंझुनू पंचायत समिति से कांग्रेस की तीसरी बार प्रधान बनी सुशीला सीगड़ा को अपना प्रत्याशी बनाया है। इस चुनाव से पूर्व दोनों ही महिला उम्मीदवार कांग्रेस पार्टी से जुड़ी रही है तथा राजनीतिक रूप से भी दोनों का जुड़ाव रहा है। दोनों एक ही जाति, एक ही बुडानिया गोत्र की बेटी है। रीटा चौधरी 2013 और 2018 में लगातार दो बार चुनाव हार चुकी है। वहीं सुशीला सीगड़ा अभी तक 4 बार पंचायत राज संस्था के चुनाव लड़ंी है व सभी चुनाव में जीत दर्ज करवायी है। यदि इस बार के उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रीटा चौधरी चुनाव हार जाती है तो उनकी हार की हैट्रिक बन जायेगी व आगे राजनीति करना उनके लिये मुश्किल हो जायेगा। भाजपा से चुनाव लड़ रही सुशीला सीगड़ा का यह प्रथम विधायक का चुनाव है। उनके खाते में अभी तक एक भी हार दर्ज नहीं हैं। यदि वो यह चुनाव हार भी जाती है तब भी उनके सामने राजनीति में बहुत अवसर है। उन्होने हाल ही में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। भाजपा में वो लम्बी राजनीतिक पारी खेल सकती हैं।