आयुष्मान भारत योजना में घोटाला और सरकार की कार्रवाई

Aanchalik Khabre
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आयुष्मान भारत योजना, जिसे देश के गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया गया था, हाल ही में धोखाधड़ी के मामलों में घिर गई है। पता चला है कि कुछ अस्पतालों ने इस योजना का गलत इस्तेमाल करते हुए ऐसे मरीजों का इलाज दिखाया जो वास्तव में कभी अस्पताल आए ही नहीं थे, या फिर इलाज का खर्च जरूरत से ज्यादा दिखाया गया।

सरकार को इन गड़बड़ियों की जानकारी मिलते ही तुरंत कड़ी कार्रवाई की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, 1,114 अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया गया, 1,504 अस्पतालों पर 122 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया और 549 अस्पतालों को निलंबित कर दिया गया। इन अस्पतालों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी इलाज के नाम पर पैसे लेने की कोशिश की थी।

नेशनल एंटी फ्रॉड यूनिट (NAFU) की भूमिका

धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार ने नेशनल एंटी फ्रॉड यूनिट (NAFU) नामक एक विशेष टीम बनाई है। इस टीम का काम योजना के तहत हो रहे किसी भी प्रकार के गलत इस्तेमाल को पकड़ना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना है। NAFU राज्य स्तरीय एंटी फ्रॉड यूनिट्स के साथ मिलकर काम करती है।

धोखाधड़ी पकड़ने के तरीके

NAFU आधुनिक तकनीकों की मदद से गड़बड़ियों का पता लगाती है। उदाहरण के लिए, एक ही मरीज के नाम पर बार-बार इलाज दिखाना, बिना इलाज के बिल बनाना, एक ही दस्तावेज़ को कई बार इस्तेमाल करना, या जरूरत से ज्यादा महंगे इलाज का झूठा दावा करना। ऐसे मामलों को NAFU सिस्टम के जरिए पकड़ लेती है और तुरंत जांच शुरू कर देती है।

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मरीजों के लिए शिकायत निवारण प्रणाली

मरीजों की सुविधा के लिए सरकार ने तीन स्तरों पर शिकायत निवारण प्रणाली बनाई है। जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अधिकारी नियुक्त किए गए हैं जो मरीजों की शिकायतों को सुनते हैं। मरीज वेबसाइट, कॉल सेंटर, ईमेल या चिट्ठी के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया और समयसीमा

अगर किसी अस्पताल ने मरीज का सही इलाज किया है, तो उसे सरकार से क्लेम का पैसा मिलता है। इसके लिए सरकार ने समयसीमा तय की है। अगर इलाज उसी राज्य में हुआ है तो 15 दिनों में और अगर दूसरे राज्य में हुआ है तो 30 दिनों में पैसा मिलना चाहिए। क्लेम की प्रक्रिया को राज्य की स्वास्थ्य एजेंसियां संभालती हैं।

मरीज की पहचान में आधार कार्ड का महत्व

सरकार ने मरीज की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार कार्ड से e-KYC को अनिवार्य कर दिया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि इलाज सही व्यक्ति को मिल रहा है और कोई भी अस्पताल फर्जी नाम से क्लेम नहीं कर सकता।

सरकार का सख्त रुख और भविष्य की योजना

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि योजना में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी अस्पताल या संस्था इस योजना का गलत इस्तेमाल करेगी, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आयुष्मान भारत योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना है, और सरकार की हालिया कार्रवाई से स्पष्ट है कि योजना को और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। इसका सीधा लाभ उन लोगों को मिलेगा जिनके लिए यह योजना बनाई गई है।

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