सरकार ने लोकसभा में पेश किया ऑनलाइन गेमिंग बिल
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन और रेगुलेशन बिल 2025 पेश किया। विपक्षी हंगामे के बीच बिल पेश किया गया और इसके तुरंत बाद लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। मंगलवार को ही कैबिनेट ने इस बिल को मंजूरी दी थी।
क्यों लाया गया है ये बिल?
सरकार का कहना है कि रियल मनी ऑनलाइन गेम्स से बच्चों और युवाओं को गंभीर नुकसान हो रहा है। यह गेम्स न सिर्फ उन्हें लत लगाते हैं, बल्कि आर्थिक नुकसान और आत्महत्या जैसे मामलों की भी वजह बनते हैं। सरकार के अनुसार करीब 45 करोड़ लोग हर साल ऐसे गेम्स में करीब 20,000 करोड़ रुपये गंवाते हैं।
क्या हैं बिल की मुख्य बातें?
1. रियल मनी गेमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध
बिल के तहत ऐसे सभी गेम्स जिनमें पैसे लगते हैं और पैसे जीतने की संभावना होती है, उन्हें प्रतिबंधित किया जाएगा। इसमें चाहे गेम स्किल आधारित हो या मौका आधारित, दोनों पर यह नियम लागू होगा।
2. सजा और जुर्माने का प्रावधान
A. अगर कोई कंपनी या व्यक्ति रियल मनी गेमिंग सेवा देता है, तो उसे 3 साल की जेल या ₹1 करोड़ तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
B.ऐसे गेम्स का विज्ञापन करने पर 2 साल की जेल या ₹50 लाख जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
C.बार-बार अपराध करने वालों को 3-5 साल की जेल और अधिक जुर्माना देना होगा।
3. बैंक और वित्तीय संस्थान भी जिम्मेदार
अगर कोई बैंक या पेमेंट गेटवे ऐसे गेम्स में ट्रांजैक्शन की सुविधा देता है तो वह भी सजा के दायरे में आएगा।
4. खिलाड़ियों को नहीं माना जाएगा अपराधी
सरकार ने साफ किया है कि ऐसे गेम्स खेलने वालों को अपराधी नहीं बल्कि पीड़ित माना जाएगा।
कैसे तय होगा कि कौन-सा गेम मनी गेम है?
सरकार एक नियामक संस्था बनाएगी जो तय करेगी कि कौन-सा गेम रियल मनी गेम है। सभी गेमिंग प्लेटफॉर्म को इस संस्था से पंजीकरण कराना होगा और इसके बनाए नियमों का पालन करना होगा।
किन गेम्स को मिलेगी राहत?
बिल में ई-स्पोर्ट्स, मनोरंजन या कौशल आधारित नॉन-मनी गेम्स को छूट दी गई है। इनमें कोई पैसा नहीं लगाया जाता, इसलिए ये नियमों के दायरे में नहीं आएंगे। सरकार चाहती है कि ऐसे गेम्स को बढ़ावा मिले ताकि देश गेमिंग हब बन सके।
भारत में तेजी से बढ़ रही है गेमिंग इंडस्ट्री
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 में भारत में 36 करोड़ गेमर्स थे जो 2024 तक 50 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं। गेमिंग सेक्टर 20% की दर से बढ़ रहा है और इसमें 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हो चुका है।
ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 का मकसद लोगों को आर्थिक और मानसिक नुकसान से बचाना है। हालांकि, इससे इंडस्ट्री और रोजगार पर असर पड़ सकता है। अब देखना होगा कि संसद में इस बिल पर कितनी बहस होती है और क्या यह अपने मौजूदा स्वरूप में पारित होता है या नहीं।
गेमिंग इंडस्ट्री की आपत्ति
ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री ने इस बिल का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस कदम से दो लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म हो सकती हैं और 400 से ज्यादा कंपनियों पर ताला लग सकता है। इंडस्ट्री का तर्क है कि इससे युवा अवैध और अपतटीय प्लेटफॉर्म्स की ओर बढ़ेंगे जो और ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं।
तीन प्रमुख संस्थाओं AIGF, EGF और FIFS ने गृहमंत्री को पत्र लिखकर चिंता जताई है कि यह बिल भारत के इनोवेशन और डिजिटल ग्रोथ को नुकसान पहुंचा सकता है।

