हिमाचल में बारिश और भूस्खलन का कहर: सैकड़ों सड़कें बंद, बिलासपुर में गिरे मकान, कई जिलों में अलर्ट

Aanchalik Khabre
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Himachal Road broken

दो दिन बाद भी राहत नहीं

हिमाचल प्रदेश में लगातार दो दिनों तक भारी बारिश और भूस्खलन के बाद बुधवार को मौसम थोड़ा साफ हुआ, लेकिन मुसीबतें अब भी कम नहीं हुई हैं। बिलासपुर जिले की ग्राम पंचायत मंझेड़ में एक मकान भरभरा कर गिर गया, जबकि धौलरा सेक्टर में एक शौचालय ढह गया। कई जगह घरों को खतरा बना हुआ है। भूस्खलन और बाढ़ की वजह से सैकड़ों सड़कें बंद हैं और बिजली-पानी की आपूर्ति भी ठप पड़ी है।

कुल्लू-मनाली हाईवे जगह-जगह टूटा

कुल्लू-मनाली हाईवे सात से आठ जगहों पर ब्यास नदी में बह गया है, जिससे मनाली और लाहौल घाटी का संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। लोग मजबूरी में पैदल सफर कर रहे हैं। मंगलवार को ब्यास नदी ने रौद्र रूप दिखाया और कई घर, दुकानें और वाहन अपने साथ बहा ले गई। ओल्ड मनाली का पुल भी ढह गया और कई जगह सड़कें धंस गईं। रायसन, बिंदू ढांक और 17 मील के पास करीब 700 मीटर हाईवे नदी में समा गया।

Himachal Road broken

लगातार अलर्ट, 2 सितंबर तक बरसेंगे बादल

मौसम विभाग ने 2 सितंबर तक राज्य के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की भविष्यवाणी की है। ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। कई जगहों पर देर रात तक 50 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

मानसून में भारी तबाही

अब तक इस मानसून सीजन में हिमाचल को 2394 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। 20 जून से 25 अगस्त तक 306 लोगों की जान जा चुकी है और 38 लोग अब भी लापता हैं। 3600 से ज्यादा घर और दुकानें या तो ढह गए हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। 1800 से अधिक पशुओं की भी मौत हो चुकी है।

हाईवे बंद, गाड़ियों में सड़ गया सामान

चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पंडोह से औट के बीच तीन दिन से बंद है। बड़ी संख्या में ट्रक और मालवाहक गाड़ियां यहां फंसी हुई हैं। इनमें लाए गए फल-सब्जियां अब सड़ने लगी हैं। ट्रक चालकों का कहना है कि प्रशासन भोजन-पानी तो उपलब्ध करा रहा है, लेकिन उनका लाखों का सामान खराब हो गया है, जिससे भारी नुकसान हो रहा है। एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग की मशीनें हाईवे बहाल करने में जुटी हुई हैं।

सोलन और कांगड़ा में ढहे मकान

सोलन के वार्ड-12 में डंगा गिरने से आसपास के घर खतरे में हैं। वहीं कांगड़ा के परागपुर गांव में पवन कुमार का स्लेटपोश मकान अचानक ढह गया। प्रशासन ने प्रभावित परिवार को तिरपाल और फौरी राहत राशि देने का आश्वासन दिया है।

मंड में बाढ़ से बिगड़े हालात

कांगड़ा जिले में पौंग बांध का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। मंड क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। एनडीआरएफ की टीमों ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कैंप बनाए गए हैं और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

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