उत्तर प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सरकारी विभागों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारी तीन साल के लिए भर्ती होंगे, जो पहले एक साल के अनुबंध पर काम करते थे। इसके साथ ही उनकी वेतन सीमा और सुविधाओं में भी सुधार किया गया है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस संबंध में कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं, जो इन कर्मचारियों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा लेकर आएंगी। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि यह नई नीति क्या है, इससे कर्मचारियों को क्या फायदा होगा और क्या-क्या बदलाव हुए हैं।
आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती अब तीन साल के लिए
पहले उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों का अनुबंध केवल एक साल के लिए होता था, जिसके कारण उनकी नौकरी में स्थिरता कम होती थी और वेतन के मामले में भी अनिश्चितता रहती थी। अब सरकार ने यह अवधि बढ़ाकर तीन साल कर दी है। तीन साल के बाद अगर कर्मचारी की कार्यक्षमता अच्छी रही तो उसका अनुबंध बढ़ाया जा सकता है। इससे कर्मचारियों को नौकरी में स्थिरता और मनोबल बढ़ाने में मदद मिलेगी।
न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपये मासिक
सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि अब आउटसोर्स कर्मचारियों को कम से कम 20 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिलेगा। पहले यह राशि करीब 10 हजार रुपये थी। वेतन में इतनी बढ़ोतरी से कर्मचारियों का जीवन स्तर बेहतर होगा और उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।
आउटसोर्स सेवा निगम का गठन
आउटसोर्सिंग एजेंसियों की मनमानी और भुगतान में अनियमितताओं को देखते हुए सरकार ने “उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम” का गठन किया है। यह निगम आउटसोर्सिंग एजेंसियों के चयन और कर्मचारियों के वेतन भुगतान की निगरानी करेगा। अब विभाग सीधे एजेंसियों का चयन नहीं करेंगे बल्कि यह काम निगम के ज़रिए होगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों को उनका पूरा हक मिलेगा।
पीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं अब कर्मचारी को मिलेंगी
इस नई व्यवस्था के तहत अब आउटसोर्स कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआई) जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी। इससे उनकी आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों में मदद मिलेगी। यह सुविधा पहले कई कर्मचारियों को नहीं मिलती थी, जिससे वे जोखिम में रहते थे।
आरक्षण और महिला कर्मचारियों के अधिकार
इस योजना में आरक्षण का भी पूरा ध्यान रखा गया है। एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिक और महिलाओं को नियमानुसार आरक्षण मिलेगा। साथ ही महिलाओं को मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) की सुविधा भी दी जाएगी, जो उनके अधिकारों की रक्षा करती है।
चयन प्रक्रिया: लिखित परीक्षा और साक्षात्कार
आउटसोर्सिंग के लिए अब लिखित परीक्षा और साक्षात्कार का आयोजन होगा। इससे केवल योग्य और काबिल उम्मीदवार ही चुने जाएंगे। इसके अलावा कर्मचारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि उनकी दक्षता बढ़े और वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
वेतन और कामकाजी नियम
-
महीने में 26 दिन काम करने का नियम होगा।
-
वेतन हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा होगा।
-
पीएफ और ईएसआई का अंशदान भी सीधे खाते में जाएगा।
-
अनियमितता पाए जाने पर सेवा तुरंत समाप्त की जा सकेगी।
वेतन संरचना: श्रेणी अनुसार वेतन
आउटसोर्स कर्मचारियों को उनकी सेवा और योग्यता के अनुसार चार श्रेणियों में बांटा गया है। प्रत्येक श्रेणी के लिए न्यूनतम वेतन अलग-अलग निर्धारित किया गया है:
-
श्रेणी एक (चिकित्सीय, अभियंत्रण, प्रबंधन जैसे उच्च पद): 40 हजार रुपये मासिक।
-
श्रेणी दो (कार्यालय, आशुलिपिक, नर्सिंग, फार्मेसी आदि): 25 हजार रुपये मासिक।
-
श्रेणी तीन (टंकण, दूरसंचार, फिटर, पैरामेडिकल आदि): 22 हजार रुपये मासिक।
-
श्रेणी चार (लिफ्ट ऑपरेटर, भंडारण, रंगरोगन, खान-पान, बागवानी आदि): 20 हजार रुपये मासिक।
निगम का संगठन और निगरानी
उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम पब्लिक लिमिटेड कंपनी होगी, जो गैर-लाभकारी संस्था के रूप में काम करेगी। इसका बोर्ड ऑफ डायरेक्टर होगा, जो नीति निर्धारण करेगा। हर स्तर पर मॉनीटरिंग कमेटी बनेगी जो कर्मचारी हितों की रक्षा करेगी।
कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा
आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान और अन्य सुविधाओं की नियमित मॉनीटरिंग के लिए निगम जिम्मेदार होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि एजेंसियां कर्मचारियों का भुगतान पूरा करें और पीएफ, ईएसआई के अंशदान में भी कोई अनियमितता न हो।
पुरानी पदों और कर्मचारियों के लिए व्यवस्था
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नई व्यवस्था उन पदों के लिए नहीं होगी जो पहले से नियमित हैं। साथ ही वर्तमान कर्मचारियों को सेवा में प्राथमिकता दी जाएगी। अनुशासनहीनता या अपराध की स्थिति में कर्मचारी को निगम की सहमति से हटाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार की यह नई नीति आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक बड़ा सुधार है। तीन साल की स्थिर भर्ती, वेतन वृद्धि, पीएफ-ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं, और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता से कर्मचारियों का जीवन बेहतर होगा। यह कदम न केवल उनके हितों की रक्षा करेगा बल्कि सरकारी कार्यों में भी दक्षता बढ़ाने में मदद करेगा। उम्मीद है कि इस नीति से यूपी में आउटसोर्सिंग व्यवस्था और मजबूत और न्यायसंगत बनेगी।
Also Read This:- भारी बारिश के कारण देश के कई शहरों में आज स्कूल बंद, जानिए कहां-कहां जारी हुए आदेश

