हरियाणा का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर मैनपाल: चाचा की हत्या से शुरू किया जुर्म, अब कंबोडिया से पकड़ा गया

Aanchalik Khabre
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Killer

हरियाणा पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। सालों से फरार चल रहा राज्य का सबसे बड़ा मोस्ट वांटेड गैंगस्टर मैनपाल बादली को आखिरकार कंबोडिया से भारत लाया गया है। मैनपाल पर हत्या, हत्या के प्रयास, अवैध हथियारों के इस्तेमाल, और आपराधिक षड्यंत्र जैसे संगीन आरोप हैं। उसकी गिरफ्तारी के पीछे सीबीआई, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और हरियाणा पुलिस के बीच शानदार तालमेल रहा।

कैसे शुरू हुई मैनपाल की जुर्म की दुनिया?

मैनपाल का आपराधिक करियर अचानक नहीं शुरू हुआ। बताया जाता है कि उसने अपने ही चाचा की हत्या कर पहली बार अपराध की दुनिया में कदम रखा था। यह मामला हरियाणा के बहादुरगढ़ के सदर थाने में साल 2007 में दर्ज हुआ था।

इसके बाद तो जैसे मैनपाल की जुर्म की राह पर चलने की गति तेज होती गई। वो छोटे-मोटे झगड़ों और मारपीट से लेकर हत्या और गैंगस्टर एक्ट जैसे मामलों तक शामिल होता गया।

उम्रकैद की सजा मिली, लेकिन पैरोल पर भाग गया

मैनपाल को 2013 में अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वो हिसार की सेंट्रल जेल में सजा काट रहा था। लेकिन फिर साल 2018 में उसे 6 हफ्ते की पैरोल पर छोड़ा गया और यहीं से कहानी ने मोड़ ले लिया।

पैरोल के बाद मैनपाल वापस जेल नहीं लौटा। वो अचानक गायब हो गया और कई महीनों तक उसके ठिकाने का कोई पता नहीं चला। इसी दौरान वो फर्जी नाम और पासपोर्ट का इस्तेमाल कर विदेश भाग गया

रेड नोटिस जारी, फिर इंटरपोल के ज़रिए शुरू हुई खोज

जब मैनपाल का कोई अता-पता नहीं मिला, तो हरियाणा पुलिस ने सीबीआई से मदद मांगी। इसके बाद 6 नवंबर 2024 को इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया गया। रेड नोटिस एक ऐसा वैश्विक अलर्ट होता है जिसे दुनिया भर की पुलिस एजेंसियां देखती हैं और इसमें अपराधी की जानकारी होती है।

सीबीआई ने इसके बाद इंटरपोल के माध्यम से एनसीबी बैंकॉक से संपर्क किया और मैनपाल की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश शुरू की।

फर्जी नाम से कंबोडिया में छिपा था मैनपाल

जांच में पता चला कि मैनपाल ने सोनू कुमार के नाम से एक फर्जी पासपोर्ट बनवाया था और इसी की मदद से वह थाईलैंड होते हुए कंबोडिया पहुंच गया था।

इसके बाद 26 मार्च 2025 को सीबीआई ने कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह स्थित भारतीय दूतावास के ज़रिए मैनपाल की गिरफ्तारी की अनुरोध भेजा।

कुछ ही महीनों में यानी 24 जुलाई 2025 को कंबोडिया पुलिस ने उसे पकड़ लिया। फिर भारत सरकार ने डिप्लोमैटिक चैनलों के ज़रिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की और अंततः 2 सितंबर 2025 को मैनपाल को भारत लाया गया।

क्यों था मैनपाल इतना खतरनाक?

मैनपाल कोई आम अपराधी नहीं था। वह हरियाणा के बड़े-बड़े गैंगों से जुड़ा हुआ था और उस पर हत्या, गैंगवार, अवैध हथियारों की सप्लाई, और जबरन वसूली जैसे कई संगीन आरोप दर्ज थे।

हरियाणा एसटीएफ के अनुसार, मैनपाल कई वर्षों तक गैंगों का ऑपरेशन विदेश से ही चलाता रहा। मोबाइल ऐप्स और वर्चुअल नंबर के जरिए वह अपने साथियों को निर्देश देता था। उसकी गिरफ्तारी से राज्य में चल रहे अपराध नेटवर्क को एक बड़ा झटका लगा है।

भारत लाने की प्रक्रिया कितनी जटिल थी?

एक अंतरराष्ट्रीय भगोड़े को वापस लाना कभी आसान काम नहीं होता। इसमें राजनयिक प्रयास, कानूनी प्रक्रियाएं और पुलिस की जांच सब कुछ शामिल होता है।

सीबीआई ने बताया कि उन्होंने कंबोडिया पुलिस को बताया कि मैनपाल ने फर्जी पहचान के सहारे वहां शरण ली है। जब ये साबित हो गया कि पासपोर्ट फर्जी है, तब जाकर कंबोडिया की सरकार ने उसे भारत को सौंपने का फैसला लिया।

भारत में इंटरपोल की क्या भूमिका होती है?

भारत में इंटरपोल से संबंधित सभी मामलों को सीबीआई ही देखती है। सीबीआई को इंटरपोल के राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो (NCB) के रूप में काम करने का अधिकार है।

सीबीआई ने पिछले कुछ सालों में इंटरपोल की मदद से 100 से ज्यादा भगोड़ों को वापस भारत लाया है, जिनमें से कई आर्थिक अपराधी, गैंगस्टर और आतंकवादी भी शामिल हैं।

अब क्या होगा मैनपाल के साथ?

अब जबकि मैनपाल को भारत लाया जा चुका है, उसे फिर से उसी केस में उम्रकैद की सजा भुगतनी होगी जिसमें वो पैरोल पर भाग गया था। साथ ही नए मामलों में भी केस दर्ज हो सकते हैं जैसे:

  1. जेल से फरारी

  2. फर्जी पासपोर्ट बनवाना

  3. विदेश में अवैध रूप से रहना

  4. नए अपराधों की योजना बनाना

माना जा रहा है कि पुलिस उससे पूछताछ करके उसके नेटवर्क और बाकी सहयोगियों के बारे में जानकारी निकालेगी, ताकि पूरे गैंग पर शिकंजा कसा जा सके।

मैनपाल की गिरफ्तारी – एक बड़ा संदेश

मैनपाल बादली की गिरफ्तारी से एक बड़ा संदेश जाता है कि अब कोई भी अपराधी कानून से बच नहीं सकता, चाहे वो देश में हो या विदेश में।

हरियाणा पुलिस और सीबीआई ने यह दिखा दिया कि यदि कोई अपराधी देश की सीमा पार करके भाग भी जाए, तो उस तक भी कानून के हाथ पहुँच सकते हैं।

यह गिरफ्तारी न सिर्फ पुलिस की सफलता है, बल्कि अपराधियों के लिए एक सख्त चेतावनी भी है।

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