नसीराबाद/सलोन, रायबरेली। इस्लाम के अंतिम पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्मदिवस (12 रबी उल अव्वल) के पावन अवसर पर कस्बा सलोन में जुलूस-ए-मदहे सहाबा का भव्य आयोजन किया गया। यह जुलूस पारंपरिक मार्गों से होता हुआ देर रात मदरसा परिसर में समाप्त हुआ।
जुलूस का मार्ग और सजावट
जुलूस ने इस्लामिया इमदादिया जूनियर हाई स्कूल, कच्ची मस्जिद चौधराना, नयागंज नई बाजार, रायबरेली प्रतापगढ़ रोड सहित शहर के सभी प्रमुख मोहल्लों से गुजरते हुए एकता और भाईचारे का संदेश फैलाया। तहसील चौराहे पर नौजवान कमेटी द्वारा एक भव्य गेट सजाया गया था, जबकि शहर के प्रत्येक मोहल्ले और घरों में विशेष सजावट देखने को मिली।
सहभागिता और धार्मिक अनुष्ठान
इस अवसर पर अंजुमन सलोन के साथ-साथ बेवली, अतागंज, रतासो, किठवा, परशदेपुर, नसीराबाद, कटेह और बसंतगंज आदि क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जुलूस में शामिल लोग “दमे चार यार, मिलकर कहो बार-बार” के नारे लगाते हुए नात और मन्क़बत पेश की।
धर्म गुरुओं का संदेश
मंच से धर्म गुरुओं ने पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आदर्शों को याद करते हुए कहा: “हमें देश में मिल-जुलकर रहना चाहिए और भाईचारे को बढ़ावा देते हुए यतीम, बेसहारा और गरीबों की मदद करनी चाहिए। पैगंबर ने फरमाया था कि लोगों को खाना खिलाओ, बीमारों की देखभाल करो और परेशान हाल लोगों की मदद करो, क्योंकि सारी दुनिया ईश्वर का परिवार है।”
सामाजिक एकता का आह्वान
इस पवित्र अवसर पर सभी ने प्रण लिया कि वे नेक बनेंगे और देश में परस्पर सौहार्द का वातावरण बनाएंगे। इस आयोजन ने साम्प्रदायिक सद्भाव और सामाजिक एकता का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया।
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