हिंदी दिवस पर ‘टूटा है अब मौन’ का लोकार्पण: साहित्यिक आयोजन में प्रेम और भाषाई समानता पर हुई गहन चर्चा

Aanchalik Khabre
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हिंदी दिवस

मुंबई, १४ सितंबर २०२५:

हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर मणिबेन नानावटी महिला महाविद्यालय और तापीबेन छगनलाल लालजी वालिया जूनियर कॉलेज में एक साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहाँ डॉ. नीलिमा पाण्डेय के प्रेम-गीत संग्रह ‘टूटा है अब मौन’ (इंडिया नेटबुक्स) का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट शिक्षाविद् डॉ. हूबनाथ पांडेय ने भाषाई समानता और सार्वभौमिक प्रेम के महत्व पर प्रकाश डाला।

“सभी भाषाएँ सम्मान के पात्र हैं”

डॉ. पांडेय ने अपने उद्बोधन में कहा, “कोई भाषा छोटी या बड़ी नहीं होती; सभी भाषाएँ समान रूप से सम्मानित हैं।” उन्होंने डॉ. नीलिमा पाण्डेय की कविताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये रचनाएँ किसी एक व्यक्ति विशेष के प्रति प्रेम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सम्पूर्ण ब्रह्मांड के प्रति गहरा अनुराग और मानवीय संवेदना व्यक्त हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रह्मांड की हर इकाई से प्रेम करने वाला ही सच्चा मानवीय सम्बन्ध स्थापित कर सकता है।

वर्तमान समय में प्रेम की प्रासंगिकता

कार्यक्रम के संयोजक एवं जाने-माने कथाकार डॉ. रवींद्र कात्यायन ने कहा कि आज के भेदभावपूर्ण माहौल में प्रेम की भावना सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। उनका मानना था कि प्रेम के माध्यम से ही समाज में व्याप्त हर समस्या का समाधान संभव है। इसी क्रम में डॉ. दयानंद तिवारी और डॉ. सुशीला तिवारी ने भी पुस्तक की रचनात्मक विशेषताओं और सामाजिक संदर्भों पर अपने विचार रखे।

लेखिका की भावनात्मक अभिव्यक्ति

डॉ. नीलिमा पाण्डेय ने हिंदी दिवस के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम को अविस्मरणीय बताते हुए कहा, “हिंदी मेरे मन और प्राणों में बसती है।” उन्होंने अपनी पुस्तक से कुछ चुनिंदा प्रेम-कविताओं का पाठ किया, जिसमें महाविद्यालय की छात्राओं ने भी सहभागिता की।

भाषाई एकता का संदेश

तापीबेन छगनलाल लालजी वालिया जूनियर कॉलेज की उप-प्राचार्य डॉ. मनीषा ने इस अवसर पर कहा कि हिंदी दिवस हमें सिर्फ एक भाषा का नहीं, बल्कि सभी भाषाओं से प्रेम करने की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम का सफल संचालन नीलू सिंह द्वारा किया गया, जबकि आभार व्यक्त प्रियंका गिरासे ने किया। यह आयोजन न केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति का मंच बना, बल्कि इसने भाषाई समानता और सार्वभौमिक प्रेम के संदेश को भी मजबूती से प्रसारित किया।

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