विश्व हिंदू परिषद ने मैमनसिंह की घटना की कड़ी निंदा की, अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप और भारत सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग
डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |
- विश्व हिंदू परिषद ने मैमनसिंह की घटना की कड़ी निंदा की, अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप और भारत सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग
- ईशनिंदा के आरोप में जिंदा जलाने का आरोप
- धर्मनिरपेक्षता पर खतरनाक हमला
- पुलिस संरक्षण के बावजूद युवक को छोड़े जाने का आरोप
- अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा पर चिंता
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग
- भारत से मूक दर्शक न रहने की अपील
- नोबेल शांति पुरस्कार वापस लेने की मांग
- ग्रेटर बांग्लादेश मानचित्र पर कड़ी आपत्ति
- देशव्यापी आंदोलन का ऐलान
मुंबई में आयोजित एक पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने बांग्लादेश के मैमनसिंह में हिंदू युवक दीपु चंद्रदास की भीड़ द्वारा की गई निर्मम हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे मानवता और कानून के शासन पर सीधा हमला बताया।
ईशनिंदा के आरोप में जिंदा जलाने का आरोप
आलोक कुमार ने पत्रकारों को बताया कि गुरुवार रात कथित ईशनिंदा के आरोपों के बाद यह जघन्य घटना सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार दीपु चंद्रदास ने कथित तौर पर यह लिखा था कि “सभी भगवान अलग-अलग नामों से एक ही हैं।” इसी कथन को ईशनिंदा करार देकर उसे भीड़ द्वारा जिंदा जला दिया गया।
धर्मनिरपेक्षता पर खतरनाक हमला
वीएचपी अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह की सोच अत्यंत खतरनाक है और यह धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद को चुनौती देती है। उन्होंने सवाल उठाया कि स्वयं को धर्मनिरपेक्ष बताने वाली ताकतें, अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कुछ वर्ग और वैश्विक मानवाधिकार मंच इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह मौन क्यों हैं।
पुलिस संरक्षण के बावजूद युवक को छोड़े जाने का आरोप
आलोक कुमार ने कहा कि निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लिमा नसरीन ने सार्वजनिक रूप से बताया है कि दीपु चंद्रदास पर झूठा ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस संरक्षण में होने के बावजूद उसे छोड़ दिया गया, जो बांग्लादेश में कानून के शासन के जानबूझकर हुए पतन को दर्शाता है।
अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा पर चिंता
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश इस समय अनिश्चितता, अराजकता और कानूनविहीनता के गंभीर दौर से गुजर रहा है। इस माहौल में कट्टरपंथी और उग्रवादी तत्वों द्वारा हिंदुओं, सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ बेलगाम हिंसा की जा रही है। दीपु चंद्रदास की हत्या को उन्होंने इस बढ़ती असुरक्षा और व्यवस्थित उत्पीड़न का भयावह प्रतीक बताया।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग
आलोक कुमार ने जोर देकर कहा कि यह स्थिति पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का नैतिक और मानवीय दायित्व है कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए।
भारत से मूक दर्शक न रहने की अपील
वीएचपी अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे हालात में भारत मूक दर्शक नहीं बना रह सकता। भारत की परंपरा रही है कि वह विश्वभर में उत्पीड़ित और पीड़ित समुदायों के साथ खड़ा रहा है। विश्व हिंदू परिषद ने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव कूटनीतिक, राजनीतिक और मानवीय उपाय करे।
नोबेल शांति पुरस्कार वापस लेने की मांग
आलोक कुमार ने स्पष्ट रूप से मुहम्मद यूनुस को दिए गए नोबेल शांति पुरस्कार को तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि जो नेतृत्व अल्पसंख्यकों की रक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहता है, उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
ग्रेटर बांग्लादेश मानचित्र पर कड़ी आपत्ति
उन्होंने मुहम्मद यूनुस द्वारा शरीफ उस्मान हादी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार दिए जाने की भी कड़ी निंदा की। आलोक कुमार ने कहा कि वही व्यक्ति पहले फेसबुक पर तथाकथित “ग्रेटर बांग्लादेश” का मानचित्र साझा कर चुका था, जिसमें भारत के सात पूर्वोत्तर राज्य, पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के कुछ हिस्से शामिल दिखाए गए थे। वीएचपी को ऐसे तत्वों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है।
देशव्यापी आंदोलन का ऐलान
आलोक कुमार ने घोषणा की कि विश्व हिंदू परिषद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा के विरोध में तथा न्याय, जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग को लेकर भारत के प्रत्येक प्रांत और जिले में देशव्यापी आंदोलन करेगी।

