प्रधानाध्यापक पर बच्चों को जाति सूचक नाम से पुकारने और मारपीट का गंभीर आरोप
डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |
- प्रधानाध्यापक पर बच्चों को जाति सूचक नाम से पुकारने और मारपीट का गंभीर आरोप
- मुख्यमंत्री की छवि खराब करने का आरोप
- मिड-डे मील में भी नाम की जगह जाति से पुकारने का आरोप
- एससी, एसटी और मुस्लिम छात्रों को बनाया गया निशाना
- शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
- जिलाधिकारी कार्यालय में धरना प्रदर्शन की चेतावनी
- शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
चित्रकूट जनपद के मानिकपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत टिकरिया मनगवां स्थित कंपोजिट विद्यालय से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां के प्रधानाध्यापक नारायण गौतम पर विद्यालय के बच्चों को जाति सूचक और अपमानजनक शब्दों से पुकारने के आरोप लगाए गए हैं।
मुख्यमंत्री की छवि खराब करने का आरोप
अभिभावकों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक की जातिवादी मानसिकता न सिर्फ बच्चों के भविष्य के लिए खतरनाक है, बल्कि इससे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि भी खराब हो रही है।
अभिभावकों का कहना है कि ऐसे शिक्षक शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करते हैं।
मिड-डे मील में भी नाम की जगह जाति से पुकारने का आरोप
एक दर्जन से अधिक अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि प्रधानाध्यापक बच्चों को पढ़ाने के दौरान ही नहीं, बल्कि मिड-डे मील वितरण के समय भी बच्चों को उनके नाम की बजाय जाति से संबोधित करते हैं और इसी आधार पर भोजन देते हैं।
एससी, एसटी और मुस्लिम छात्रों को बनाया गया निशाना
अभिभावकों के अनुसार, प्रधानाध्यापक द्वारा विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और मुस्लिम समुदाय के छात्रों को टारगेट किया जाता है।
आरोप है कि बच्चों के साथ मारपीट, अपमानजनक व्यवहार किया गया और यहां तक कि कुछ बच्चों के बाल तक उखाड़ लिए गए।
शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
परिजनों का आरोप है कि इस पूरे मामले की शिकायत शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और पुलिस विभाग से की गई, लेकिन अब तक न तो निष्पक्ष जांच हुई और न ही दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की गई।
जिलाधिकारी कार्यालय में धरना प्रदर्शन की चेतावनी
कार्रवाई न होने से नाराज एक दर्जन से अधिक अभिभावकों ने ऐलान किया है कि वे जल्द ही चित्रकूट जिलाधिकारी कार्यालय में धरना-प्रदर्शन करेंगे।
अभिभावकों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी बच्चे के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार न हो।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि स्कूलों में बच्चों के साथ समानता, सम्मान और संवैधानिक मूल्यों का पालन हो रहा है या नहीं। अब देखना होगा कि प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

