नीति, समाज और सरकार एक टेबल पर
डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |
दिल्ली के पावर कॉरिडोर से आज एक अहम तस्वीर सामने आई, जहां कानून, समाज और सरकार एक ही टेबल पर बैठे नज़र आए। पंचशील भवन में उच्च न्यायालय के 15 वर्षों के अनुभवी अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता ने केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान से शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाक़ात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि नीति और ज़मीनी हकीकत के बीच सेतु बनाने की एक गंभीर पहल मानी जा रही है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और किसानों का सीधा लाभ
बैठक के दौरान चर्चा का मुख्य केंद्र देश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विस्तार पर रहा। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि किस तरह किसानों को उनके उत्पाद का सीधा और वास्तविक लाभ मिल सके। अधिवक्ता ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत में कच्चे माल की कोई कमी नहीं है, लेकिन प्रोसेसिंग के अभाव में किसानों की आय सीमित रह जाती है।
ग्रामीण रोज़गार और पलायन रोकने पर मंथन
मुलाक़ात में यह भी रेखांकित किया गया कि यदि कानून, नीति और प्रशासन एक साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत से हो रहा पलायन रोका जा सकता है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि किसान भी आत्मनिर्भर बन सकेंगे। युवाओं के लिए स्वरोज़गार के नए रास्ते खोलने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
विधिक जागरूकता और सामाजिक न्याय पर जोर
बैठक की एक अहम कड़ी विधिक जागरूकता और सामाजिक न्याय रही। अधिवक्ता ने कहा कि कई सरकारी योजनाएं काग़ज़ों में तो मज़बूत हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पातीं। उन्होंने सुझाव दिया कि पंचायत स्तर पर कानूनी जागरूकता बढ़ाई जाए, स्वयं सहायता समूहों को कानूनी संरक्षण मिले और छोटे उद्यमियों के लिए नियमों को सरल बनाया जाए, तभी ज़मीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव संभव होगा।
‘फार्म से फैक्ट्री तक’ की दूरी कम करने का भरोसा
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है “फार्म से फैक्ट्री तक” की दूरी को कम करना। उन्होंने PMFME योजना, फूड पार्क्स और स्टार्टअप सपोर्ट स्कीम्स का ज़िक्र करते हुए कहा कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और सामाजिक सहभागिता सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा है।

