गणतंत्र दिवस पर 1270 किलो चिकन की दावत! मेहमान का नाम जानकर चौंक जाएंगे

Anchal Sharma
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दिल्ली की काली चीलों के लिए खास इंतज़ाम, फ्लाई-पास्ट की सुरक्षा से जुड़ी है पूरी रणनीति

डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें

26 जनवरी, कर्तव्य पथ। एक ओर राष्ट्रगान की गूंज, तिरंगे की शान, टैंक-तोपों की गर्जना और आसमान में राफेल व सुखोई की गड़गड़ाहट—तो दूसरी ओर दिल्ली में एक ऐसी तैयारी, जिसे सुनकर हर कोई चौंक जाता है। बात हो रही है 1270 किलो बोनेलेस चिकन की। सवाल उठता है कि गणतंत्र दिवस पर इतनी बड़ी मात्रा में चिकन आखिर किसके लिए?

ना नेताओं की दावत, ना अफसरों का भोज

यह न तो किसी वीआईपी पार्टी की तैयारी है, न ही सरकारी लंगर या किसी फाइव-स्टार होटल का मेन्यू। यह चिकन खुले मैदान में, खुले आसमान के नीचे डाला जाता है। इसे खाने वाले होते हैं दिल्ली की मशहूर ब्लैक काइट्स यानी काली चीलें।

काली चीलें और दिल्ली का पुराना रिश्ता

दिल्ली और काली चीलों का रिश्ता वर्षों पुराना है। कूड़े के ढेर, मांस की दुकानें और खुले में पड़ा खाना इनके लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रहे हैं। आम दिनों में ये पक्षी किसी की नज़र में नहीं आते, लेकिन जैसे ही तारीख आती है 26 जनवरी, ये अचानक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन जाते हैं।

आसमान की सुरक्षा से जुड़ा मामला

गणतंत्र दिवस केवल ज़मीन पर होने वाला आयोजन नहीं है। इस दिन आसमान में भी हाई-स्पीड फ्लाई-पास्ट होता है, जिसमें फाइटर जेट्स और हेलीकॉप्टर सेकेंड-टू-सेकेंड टाइमिंग के साथ उड़ान भरते हैं। ऐसे में अगर किसी तेज़ रफ्तार विमान के रास्ते में भारी पक्षी आ जाए, तो यह गंभीर खतरे में बदल सकता है।

चिकन रणनीति कैसे करती है काम

चीलों को नुकसान पहुंचाना या डराकर भगाना कोई विकल्प नहीं है। विशेषज्ञों ने रणनीति बनाई—भूखे पक्षी को भगाने के बजाय उसे सुरक्षित दूरी पर खाना दिया जाए। इसी सोच के तहत परेड रूट और फ्लाई-पास्ट ज़ोन से दूर तय स्थानों पर 1270 किलो बोनेलेस चिकन डाला जाता है, ताकि चीलें वहीं व्यस्त रहें और आसमान सुरक्षित रहे।

मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था

चिकन फीडिंग के साथ-साथ बर्ड स्केयरिंग टीमें, साउंड डिवाइस, ड्रोन से निगरानी और कचरा नियंत्रण जैसे इंतज़ाम भी किए जाते हैं। ज़मीन से लेकर आसमान तक सुरक्षा की कई परतें तैयार की जाती हैं, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी पूरे राष्ट्रीय आयोजन पर भारी पड़ सकती है।

परफेक्ट फ्लाई-पास्ट के पीछे छुपी कहानी

जब 26 जनवरी को आप टीवी स्क्रीन पर राफेल को सीना ताने उड़ते और सुखोई को आसमान में सलामी देते देखें, तो याद रखिएगा—उस परफेक्ट फ्लाई-पास्ट के पीछे सिर्फ़ पायलटों की मेहनत नहीं, बल्कि दिल्ली की काली चीलों के लिए रखी गई 1270 किलो बोनेलेस चिकन की दावत भी अहम भूमिका निभा रही होती है।

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