विरोध मार्च, ‘लक्ष्मण रेखा’ बयान और एजेंसियों पर आरोपों से बढ़ा राजनीतिक टकराव
डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |
- विरोध मार्च, ‘लक्ष्मण रेखा’ बयान और एजेंसियों पर आरोपों से बढ़ा राजनीतिक टकराव
- I-PAC और TMC से जुड़े ठिकानों पर ED की कार्रवाई
- ममता बनर्जी का आरोप: एजेंसियों का हो रहा दुरुपयोग
- ED रेड के बाद 6 किलोमीटर का विरोध मार्च
- अमित शाह पर भी लगाए आरोप
- भाजपा का जवाब: भावनात्मक राजनीति और दबाव की कोशिश
- 2026 से पहले और तेज होगी सियासी टकराहट
पश्चिम बंगाल की राजनीति अब केवल विचारधारा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह व्यक्तिगत आरोपों, केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और सियासी चेतावनियों के दौर में प्रवेश कर चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सड़कों पर उतरना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि 2026 से पहले राज्य का राजनीतिक तापमान और बढ़ने वाला है।
I-PAC और TMC से जुड़े ठिकानों पर ED की कार्रवाई
हाल ही में ED ने चुनावी रणनीति से जुड़ी संस्था I-PAC और तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कुछ ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे केंद्र सरकार द्वारा किया गया राजनीतिक प्रतिशोध बताया।
ममता बनर्जी का आरोप: एजेंसियों का हो रहा दुरुपयोग
ममता बनर्जी का कहना है कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्ष को डराने और दबाने की कोशिश कर रही है। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसका उद्देश्य राजनीतिक लाभ उठाना है।
ED रेड के बाद 6 किलोमीटर का विरोध मार्च
ED की कार्रवाई के विरोध में ममता बनर्जी ने कोलकाता में लगभग 6 किलोमीटर लंबा विरोध मार्च निकाला। इसी दौरान उन्होंने बयान दिया—
“लक्ष्मण रेखा पार मत करो।”
यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। कुछ इसे केंद्र के लिए चेतावनी मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक धमकी के रूप में देख रहे हैं।
अमित शाह पर भी लगाए आरोप
इस विरोध के दौरान ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कथित तौर पर कोयला घोटाले से जुड़े धन-निष्कासन (मनी लॉन्ड्रिंग) का जिक्र किया, जिस पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया।
भाजपा का जवाब: भावनात्मक राजनीति और दबाव की कोशिश
भाजपा नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी भ्रष्टाचार के मामलों से ध्यान भटकाने के लिए भावनात्मक बयान दे रही हैं। पार्टी का आरोप है कि मुख्यमंत्री केंद्रीय एजेंसियों पर दबाव बनाना चाहती हैं और राजनीतिक लाभ के लिए संस्थाओं को बदनाम कर रही हैं।
भाजपा ने ममता बनर्जी पर दंगे भड़काने, भ्रष्टाचार को संरक्षण देने और संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
2026 से पहले और तेज होगी सियासी टकराहट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे 2026 का विधानसभा चुनाव नजदीक आएगा, बंगाल में केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव और तेज होगा। ED की कार्रवाई और उसके बाद की राजनीतिक प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में बंगाल की राजनीति और अधिक आक्रामक रूप लेने वाली है।

