कड़ाके की ठंड में डटे किसान, इंदौर हादसे के बाद भी प्रशासन पर उदासीनता का आरोप
डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |
- कड़ाके की ठंड में डटे किसान, इंदौर हादसे के बाद भी प्रशासन पर उदासीनता का आरोप
- केमिकल फैक्ट्रियों पर भूजल दूषित करने का आरोप
- इंदौर की घटना के बाद भी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
- बड़ी घटना की आशंका, गांव-गांव जागरूकता अभियान
- किसानों की प्रमुख मांगें
- धरना खत्म कराने की कोशिशें, लेकिन किसान अडिग
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद की औद्योगिक नगरी गजरौला में दूषित पेयजल की गंभीर समस्या को लेकर भारतीय किसान यूनियन संयुक्त मोर्चा के बैनर तले किसानों का धरना पिछले 13 दिनों से लगातार जारी है। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान धरना स्थल पर डटे हुए हैं और प्रशासन से ठोस एवं स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
केमिकल फैक्ट्रियों पर भूजल दूषित करने का आरोप
किसानों का आरोप है कि गजरौला औद्योगिक क्षेत्र में संचालित केमिकल फैक्ट्रियों के कारण इलाके का भूजल बुरी तरह प्रदूषित हो चुका है। कई गांवों में किसानों के ट्यूबवेल से पीला और बदबूदार पानी निकल रहा है, जिससे न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है, बल्कि पशुओं पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है।
इंदौर की घटना के बाद भी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
किसान नेताओं का कहना है कि हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से 15 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अमरोहा प्रशासन इस समस्या को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा। आरोप है कि प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति के तौर पर दोबारा पानी के सैंपल लेकर मामले को टालने की कोशिश कर रहा है।
बड़ी घटना की आशंका, गांव-गांव जागरूकता अभियान
धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो अमरोहा में भी किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी को लेकर किसान यूनियन के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को दूषित पानी से होने वाले खतरों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि
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दूषित पानी के लिए जिम्मेदार केमिकल फैक्ट्रियों पर सख्त कार्रवाई की जाए
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प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल की तत्काल व्यवस्था की जाए
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दूषित भूजल की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए
धरना खत्म कराने की कोशिशें, लेकिन किसान अडिग
बताया जा रहा है कि फैक्ट्री संचालक किसानों के दबाव और आंदोलन के डर से उनके खेतों में साफ पानी उपलब्ध कराने के लिए पहले जहां 200 फीट पर बोरिंग थी, वहां अब 500 फीट तक बोरिंग कराना शुरू कर चुके हैं, ताकि किसानों की नाराजगी कम हो सके। हालांकि इसके बावजूद किसान अभी भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और धरना जारी है।

