आखिर कौन होगा नवजात शिशु का पालनहार?

Anchal Sharma
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पांच दिन से निजी अस्पताल में भर्ती लावारिस नवजात, इलाज और जिम्मेदारी को लेकर प्रशासन पर उठे सवाल

डिजिटल डेस्क | आंचलिक डेस्क |

अमरोहा जिले के गजरौला क्षेत्र से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। भीकमपुर सुमाली इलाके में कूड़े के ढेर से मिले एक नवजात शिशु का पिछले पांच दिनों से निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है, लेकिन अब तक शासन–प्रशासन ने उसकी जिम्मेदारी लेने से हाथ खींच लिए हैं। हालात यह हैं कि बच्चे के इलाज का खर्च कौन उठाएगा, इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा है।

कूड़े के ढेर में मिला था नवजात, हालत गंभीर

भीकमपुर सुमाली में कूड़े के ढेर में पड़े नवजात की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। बच्चे की हालत गंभीर होने के कारण उसे तत्काल गजरौला नगर स्थित निजी अस्पताल ‘रैंबो’ में भर्ती कराया गया।

मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने नवजात को गोद लेने और इलाज का खर्च उठाने की इच्छा भी जताई, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया कि बच्चा ठीक होने के बाद चाइल्ड डिपार्टमेंट को सौंपा जाएगा, और आगे का निर्णय वहीं से होगा। यह सुनकर कई लोग पीछे हट गए।

पांच दिन बाद भी प्रशासन की चुप्पी

नवजात को अस्पताल में भर्ती हुए अब पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन न तो प्रशासन बच्चे को अपनी कस्टडी में ले रहा है और न ही इलाज के खर्च को लेकर कोई ठोस व्यवस्था की गई है।

अस्पताल संचालक डॉ. हर्षित पालीवाल का कहना है कि यदि इस दौरान बच्चे के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

सीएचसी से लेकर सीएमओ तक दी गई सूचना

डॉ. हर्षित पालीवाल के अनुसार, उन्होंने इस मामले की जानकारी गजरौला सीएचसी अधीक्षक डॉ. योगेंद्र सिंह को दी, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद अमरोहा के सीएमओ को भी अवगत कराया गया।

सीएमओ की ओर से कहा गया कि जिला अस्पताल में नवजातों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, इसलिए जब तक बच्चा पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाता, वह निजी अस्पताल में ही रहेगा। साथ ही यह भी कहा गया कि “आपसे ज्यादा काबिल डॉक्टर कोई नहीं है”, जिस पर डॉ. पालीवाल ने चिंता जताते हुए सवाल उठाया कि इलाज का खर्च आखिर कैसे मैनेज किया जाए?

इलाज का खर्च बना सबसे बड़ा सवाल

सीएमओ की ओर से यह जरूर कहा गया कि कुछ दवाइयां सरकारी अस्पताल में उपलब्ध हैं, जिन्हें वहां से लिया जा सकता है, लेकिन पूरे इलाज की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है।

यही सवाल अब सबसे बड़ा बन गया है—
इस नवजात के इलाज और भविष्य की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?

डॉक्टर ने वीडियो बनाकर उठाई आवाज

निराशा और चिंता के बीच डॉ. हर्षित पालीवाल ने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है, जिसमें उन्होंने शासन और प्रशासन से अपील की है कि नवजात को सरकारी कस्टडी में लिया जाए,और उसका इलाज सरकारी जिम्मेदारी में कराया जाए।

डॉक्टर का कहना है कि यह केवल एक बच्चे का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही की का सवाल है |

अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन–प्रशासन कब जागता है और इस नवजात को उसका हक कब मिलता है।

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