उत्तर प्रदेश के जनपद अमरोहा से पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। अमरोहा शहर कोतवाली के अंतर्गत आने वाली वासुदेव चौकी प्रभारी दरोगा परशुराम का रिश्वत मांगते हुए वीडियो वायरल हो गया है। इस वीडियो में दरोगा इलाहाबाद हाईकोर्ट में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए स्पीड से 10 हजार रुपए की मांग करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और मामला जिले के आला अधिकारियों तक पहुंच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अमरोहा के एसपी ने तुरंत दरोगा परशुराम को निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए।
वीडियो वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया
रिश्वतखोरी का यह मामला जैसे ही मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिले में हड़कंप मच गया। पुलिस की छवि को धूमिल करने वाला यह वीडियो आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया। पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर पहले भी कई सवाल उठ चुके हैं, लेकिन इस बार मामला कैमरे में कैद हो गया।
सूत्रों के अनुसार, वीडियो में दरोगा परशुराम एक व्यक्ति से हाईकोर्ट में एफिडेविट दाखिल करवाने के नाम पर 10 हजार रुपये की मांग कर रहे थे। बातचीत के दौरान वे पुलिसिया रौब झाड़ते भी नजर आए, लेकिन पीड़ित के साथी ने चुपके से इस पूरी घटना को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दरोगा को निलंबित कर दिया और विभागीय जांच बैठा दी।
दरोगा परशुराम का नाम इससे पहले भी विवादों में रह चुका है। करीब दो महीने पहले एक राजनीतिक दल की महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष ने उन पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे।
महिला नेता का आरोप था कि एक दुष्कर्म के आरोपी के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की जा रही थी, जिसकी वजह से उसने पुलिस कार्यालय में पेट्रोल छिड़ककर आत्महत्या करने की धमकी दी थी। उस समय वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को दबाने की कोशिश की थी, लेकिन अब रिश्वत लेते हुए वीडियो सामने आने के बाद पूरा मामला फिर से उजागर हो गया है।
पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार की यह कहानी यूं ही उजागर नहीं हुई। पीड़ित व्यक्ति अपने साथी के साथ चौकी पहुंचा था, जहां दरोगा खुलेआम रिश्वत मांग रहे थे और अपने रसूख का दिखावा कर रहे थे।
पीड़ित के साथी ने पूरी बातचीत को मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया और बाद में इसे सोशल मीडिया पर डाल दिया। कुछ ही घंटों में यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और मीडिया में इस खबर ने जोर पकड़ लिया। जब मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा, तो उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए दरोगा परशुराम को निलंबित कर दिया और जांच शुरू कर दी।
पुलिस विभाग की छवि को लगा बड़ा झटका
उत्तर प्रदेश सरकार भले ही कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही हो, लेकिन पुलिस विभाग में मौजूद भ्रष्ट अधिकारी सरकार की मंशा को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि नीचे स्तर तक भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। जनता का पुलिस पर भरोसा कमजोर हो रहा है और लोग खुलकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
एसपी के आदेश और आगे की कार्रवाई
अमरोहा के एसपी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दरोगा परशुराम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या केवल निलंबन और जांच ही पर्याप्त हैं?
पुलिस विभाग में ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि दूसरे अधिकारी इस तरह की हरकतें करने से बचें।
जनता की नाराजगी और पुलिस सुधार की मांग
इस घटना के बाद जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि यह वीडियो वायरल न हुआ होता, तो शायद मामला फिर से दबा दिया जाता।
अब आम जनता की मांग है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पुलिस विभाग में पारदर्शिता लाई जाए।
क्या केवल निलंबन काफी है?
सिर्फ निलंबन से कुछ नहीं होगा। ऐसे अधिकारियों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई अधिकारी रिश्वत लेने की हिम्मत न करे।
दरोगा परशुराम की यह हरकत न सिर्फ पुलिस विभाग की छवि को खराब करती है, बल्कि आम जनता का पुलिस से विश्वास भी उठाती है।
सरकार को चाहिए कि ऐसे भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई करे, ताकि पुलिस महकमे में अनुशासन बना रहे और जनता को न्याय मिल सके।
अब देखना यह होगा कि क्या इस मामले में कोई कड़ी कार्रवाई होती है या यह भी सिर्फ एक निलंबन और जांच तक ही सीमित रह जाएगा।