उत्तर प्रदेश के जनपद अमरोहा के गजरौला में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (शंकर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी दिवाकर सिंह के नेतृत्व में संगठन के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह धरना-प्रदर्शन चौपला फ्लाईओवर के नीचे आयोजित किया गया, जिसमें किसानों की समस्याओं को लेकर प्रशासन को घेरा गया और सरकार से जल्द समाधान की मांग की गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री को संबोधित एक मांगपत्र उपजिलाधिकारी धनौरा को सौंपा गया, जिसमें विभिन्न किसान समस्याओं के त्वरित निस्तारण की अपील की गई।
धरने में गूंजे किसानों के नारे
भारतीय किसान यूनियन (शंकर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी दिवाकर सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों किसान धरने में शामिल हुए। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। उनके हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर ‘किसानों के हक की लड़ाई जारी रहेगी’, ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कानून बनाओ’, ‘बिजली के बढ़ते दाम कम करो’ जैसे नारे लिखे हुए थे।
धरने के दौरान चौधरी दिवाकर सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा, “केंद्र और राज्य सरकारें किसानों के मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। हम सरकार को यह बताना चाहते हैं कि यदि हमारी मांगे पूरी नहीं हुईं, तो हमारा आंदोलन और उग्र होगा।”
मांगपत्र में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
इस धरने में किसानों ने अपनी कई समस्याओं को उठाया और समाधान की मांग की। मांगपत्र में जिन प्रमुख मुद्दों को शामिल किया गया, वे इस प्रकार हैं:
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी: किसानों ने मांग की कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
बिजली दरों में कटौती: किसानों ने कहा कि बिजली के बढ़ते दाम उनकी खेती को महंगा बना रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। इसलिए बिजली दरों को कम किया जाए।
सिंचाई सुविधाओं का विस्तार: गजरौला और आसपास के क्षेत्रों में कई जगह सिंचाई के उचित साधन उपलब्ध नहीं हैं। किसानों ने सरकार से नहरों की सफाई और जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।
गन्ना भुगतान में देरी: किसान लंबे समय से गन्ना मिलों द्वारा भुगतान में हो रही देरी से परेशान हैं। उन्होंने समयबद्ध भुगतान की व्यवस्था लागू करने की मांग की।
कृषि उपकरणों पर सब्सिडी: किसानों ने कृषि उपकरणों और खाद-बीज पर अधिक सब्सिडी देने की मांग की, ताकि छोटे और मध्यम वर्ग के किसान भी आधुनिक खेती अपना सकें।
फसलों के उचित बीमा की सुविधा: किसानों ने मांग की कि उन्हें प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल खराब होने पर तत्काल मुआवजा दिया जाए और बीमा प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
प्रशासनिक अधिकारियों का आश्वासन
धरने में शामिल किसानों ने अपनी मांगों को लेकर जबरदस्त प्रदर्शन किया। धरने की सूचना मिलने के बाद संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द किया जाएगा।
उपजिलाधिकारी धनौरा ने कहा, “हम किसानों की सभी मांगों को गंभीरता से लेंगे और इसे उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे। सरकार भी किसानों के हित में कार्य कर रही है और समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।”
किसानों की सरकार को चेतावनी
धरने में किसानों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगे जल्द नहीं मानी गईं, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे। चौधरी दिवाकर सिंह ने कहा, “यह सिर्फ शुरुआत है, अगर किसानों की समस्याओं का निस्तारण नहीं हुआ, तो हम पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन करेंगे। किसानों का हक कोई छीन नहीं सकता। जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होंगी, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।”
किसानों के इस आंदोलन को विभिन्न किसान संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। गजरौला के अलावा अन्य जिलों से भी किसान इस प्रदर्शन में शामिल हुए और अपनी एकता का परिचय दिया।
किसानों की दयनीय स्थिति पर रोष
धरने के दौरान किसानों ने कहा कि सरकारें बड़े उद्योगपतियों को तो तरह-तरह की राहत देती हैं, लेकिन किसानों की सुध नहीं लेतीं। “जब किसान आत्महत्या करते हैं, तब सरकार को उनकी याद आती है, लेकिन उनके जीवन को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते,” एक किसान ने कहा।
एक अन्य किसान ने बताया कि “हमारा पूरा जीवन खेतों में मेहनत करने में बीत जाता है, लेकिन हमें उसका उचित दाम नहीं मिलता। अगर हम सरकार से अपने हक की मांग करें, तो हमें प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ता है।”
आंदोलन की आगामी रणनीति
धरने के समापन के बाद किसानों ने एक बैठक की, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि सरकार जल्द ही मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती, तो भारतीय किसान यूनियन (शंकर) पूरे उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन करेगा और जरूरत पड़ने पर दिल्ली तक आंदोलन किया जाएगा।
किसानों ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ गजरौला तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रदेश के हर जिले तक पहुंचाया जाएगा, ताकि सरकार किसानों की मांगों को गंभीरता से ले।
भारतीय किसान यूनियन (शंकर) के नेतृत्व में गजरौला में हुए इस धरने ने किसानों की एकता और उनकी मांगों की गंभीरता को दर्शाया है। किसानों ने अपनी समस्याओं को खुलकर रखा और सरकार से ठोस समाधान की अपील की। प्रशासन ने किसानों को आश्वासन तो दिया है, लेकिन अब यह देखना होगा कि उनकी मांगों पर कितना और कब तक अमल होता है।
अगर सरकार जल्द ही किसानों की समस्याओं का निस्तारण नहीं करती, तो यह आंदोलन और भी बड़ा रूप ले सकता है। आने वाले दिनों में किसानों की अगली रणनीति पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।