अरावली पर्वतमाला पर खनन को लेकर केंद्र का बड़ा फैसला

Anchal Sharma
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नई खनन नीति बनने तक पूरी तरह से बंद रहेगा नया खनन

डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें 

अरावली पर्वतमाला को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अरावली रेंज में नए खनन पट्टे देने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नई खनन नीति तय नहीं हो जाती।

राज्यों को भेजा गया आधिकारिक पत्र

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस संबंध में हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए फिलहाल किसी भी नए खनन क्षेत्र की मंजूरी नहीं दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनेगी नई नीति

मंत्रालय ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में अरावली के संरक्षण और खनन को लेकर एक नई नीति तैयार की जाएगी। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक नया खनन पूरी तरह बंद रहेगा।

अरावली क्यों है देश के लिए जरूरी?

अरावली पर्वतमाला देश की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में से एक है और इसे पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद आवश्यक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां बढ़ता खनन पर्यावरण और जल स्रोतों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।

रेगिस्तान के फैलाव पर लगाती है रोक

अरावली पर्वतमाला उत्तर भारत में रेगिस्तान के फैलाव को रोकने में अहम भूमिका निभाती है। अगर अरावली कमजोर होती है, तो राजस्थान का रेगिस्तान हरियाणा और दिल्ली तक फैल सकता है।

दिल्ली-एनसीआर को मिलती है साफ हवा

अरावली के जंगल और पहाड़ धूल-मिट्टी को रोकते हैं, जिससे दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में प्रदूषण कम होता है और लोगों को अपेक्षाकृत साफ हवा मिलती है।

भूजल और जल स्रोतों की जीवनरेखा

अरावली क्षेत्र में कई नदियाँ, झीलें और भूजल स्रोत मौजूद हैं। यह पर्वतमाला बारिश के पानी को जमीन में रोककर भूजल स्तर बढ़ाने में मदद करती है, जो भविष्य की जल सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

गर्मी और हीटवेव पर भी असर

अरावली पर्वतमाला गर्म हवाओं और आंधियों की तीव्रता को कम करती है, जिससे तापमान संतुलित रहता है और हीटवेव का असर घटता है।

पर्यावरण को राहत, उद्योग पर असर

सरकार के इस फैसले से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर खनन उद्योग पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी और नई नीति पर टिकी हुई हैं।

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