जुलूस-ए-गरीब नवाज़ के दौरान जताया गया गहरा दुख और आक्रोश
डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |
- जुलूस-ए-गरीब नवाज़ के दौरान जताया गया गहरा दुख और आक्रोश
- जुलूस-ए-गरीब नवाज़ के दौरान जारी किया गया बयान
- कानून हाथ में लेना अमानवीय अपराध : हाजी सईद नूरी
- धर्म के आधार पर हिंसा अस्वीकार्य
- बांग्लादेश सरकार से उठाई सख्त मांगें
- शांति और धार्मिक सौहार्द पर ज़ोर
- बड़ी संख्या में उलेमा और लोग रहे शामिल
- मदनपुरा से भिंडी बाज़ार तक निकला जुलूस
मुंबई में बांग्लादेश में हाल ही में एक गैर-मुस्लिम नागरिक की कथित रूप से भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने की हृदयविदारक घटना पर ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलमा और रज़ा अकैडमी ने गहरा दुख, आक्रोश और चिंता व्यक्त की है। संगठन ने इस घटना को अमानवीय बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की।
जुलूस-ए-गरीब नवाज़ के दौरान जारी किया गया बयान
यह बयान ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के 814वें उर्स के अवसर पर निकाले गए जुलूस-ए-गरीब नवाज़ के दौरान दिया गया। उल्लेखनीय है कि यह रज़ा अकैडमी और उसके संबद्ध संगठनों द्वारा निकाला गया 11वाँ जुलूस-ए-गरीब नवाज़ था।
कानून हाथ में लेना अमानवीय अपराध : हाजी सईद नूरी
जुलूस की अध्यक्षता और कयादत करते हुए रज़ा अकैडमी के अध्यक्ष हाजी मुहम्मद सईद नूरी ने कहा कि किसी भी नागरिक को कानून अपने हाथ में लेने वाले तत्वों द्वारा हिंसा का शिकार बनाना न केवल अमानवीय अपराध है, बल्कि यह संविधान, कानून और मूल मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन भी है।
धर्म के आधार पर हिंसा अस्वीकार्य
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म, आस्था या पहचान के आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ हिंसा, नफ़रत या हत्या किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएँ समाज में भय, असुरक्षा और अराजकता को बढ़ावा देती हैं और न्याय व्यवस्था को कमजोर करती हैं।
बांग्लादेश सरकार से उठाई सख्त मांगें
हाजी सईद नूरी ने बांग्लादेश सरकार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायिक प्रणाली से ज़ोरदार मांग करते हुए कहा कि:
- इस घटना की तत्काल, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए
- घटना में शामिल सभी दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जाए
- पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा प्रदान की जाए
- अल्पसंख्यक समुदायों की जान-माल की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएँ
- भविष्य में मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
शांति और धार्मिक सौहार्द पर ज़ोर
रज़ा अकैडमी के प्रमुख ने कहा कि संगठन शांति, सहिष्णुता, धार्मिक सौहार्द और कानून के शासन में विश्वास रखता है और उसे उम्मीद है कि बांग्लादेशी अधिकारी इस गंभीर मामले में त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करेंगे।
बड़ी संख्या में उलेमा और लोग रहे शामिल
जुलूस-ए-गरीब नवाज़ में अहले-सुन्नत के बड़ी संख्या में लोग, मदरसों के छात्र और उलेमा-ए-कराम शामिल हुए। प्रमुख रूप से मौलाना फ़रीदुज़्ज़मां, मौलाना अमानुल्लाह, मौलाना ख़लीलुर्रहमान नूरी, मौलाना अब्बास रिज़वी, क़ारी अब्दुर्रहमान ज़ियाई सहित अन्य उलेमा उपस्थित थे।
मदनपुरा से भिंडी बाज़ार तक निकला जुलूस
जुलूस से पूर्व सुन्नी बड़ी मस्जिद, मदनपुरा में एक संक्षिप्त महफ़िल का आयोजन किया गया, जिसमें सरकार-ए-गरीब नवाज़ की सीरत पर प्रकाश डाला गया। इसके बाद जुलूस मदनपुरा से निकलकर नागपाड़ा जंक्शन, दो टंकी, जे.जे. सिग्नल होते हुए मीनारा मस्जिद, मोहम्मद अली रोड, भिंडी बाज़ार पहुँचा, जहाँ सलात-ओ-सलाम और देश में अमन-ओ-अमान की दुआ के साथ जुलूस का समापन हुआ।

