भैयालाल धाकड़
घर-घर होगी नवरात्रि आराधना, अखंड ज्योति की जायेंगी प्रज्ज्वलित
विदिशा,
धर्मगुरु धर्माधिकारी गिरधर गोविन्द प्रसाद शास्त्री ने बताया की भारतीय संस्कृति के नव वर्ष का शुभारम्भ चैत्र शुक्ल गुड़ी पड़वा एवं नवरात्रि 22 मार्च बुधवार के सूर्योदय से होगा, घट स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः काल 6:00 बजे से प्रातः 9:00 बजे तक एवं दिन में 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक एवं सायं 4:30 से 6 बजे तक शुभ मुहूर्त्त है। जवाहरे बो कर एवं श्री दुर्गा जी के मंदिरों में अखण्ड ज्योति की स्थापना करके देवी आराधना की जावेगी, नवीन वर्ष के संवत्सर का नाम नल, वर्ष के राजा बुध एवं मंत्री शुक्र हैं अतः देश में सुख शांति एवं समृद्धि की प्राप्ति होगी ।
नवरात्रि के प्रथम दिवस माँ शैलपुत्री की आराधना की जाती है।
वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृत शेखराम्।
वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्वनीम्॥
माँ शैलपुत्री वृषभ पर विराजमान हैं मस्तक पर अर्द्ध चंद्र धारण किये हुये हैं , दाहिने हस्त में त्रिशूल और बाएं हस्त में कमल पुष्प धारण किये हुए है। माँ शैलपुत्री की आराधना से चंद्रमा संबंधित दोषों का निवारण होता हैं एवं मनोकामनायें पूर्ण होती है ।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन भुवन भास्कर भगवान श्री सूर्य नारायण का प्राकट्य दिवस है, पृथ्वी पर प्रकाश की प्रथम किरण गुड़ी पड़वा को सूर्योदय से प्रारंभ हुई थी, भगवान श्री ब्रह्मा जी ने गुड़ी पड़वा के दिन सृष्टि की रचना को आरंभ किया था, गुड़ी पड़वा के दिन से विक्रम संवत् प्रारंभ हुआ था, सतयुग का प्रारंभ गुड़ी पड़वा के दिन हुआ था, ज्योतिष की कालगणना गुड़ी पड़वा के दिन से प्रारंभ हुई थी।
दुर्गा सप्तशती के मंत्र-
जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
का जप करें, नीम एवं मिश्री के सेवन से निरोगता की प्राप्ति होती है, अष्ट वर्षेत् भवेत् गौरी 8 वर्ष की कन्या जो घर के आसपास निवासी हो उसको बुलाकर तिलक लगाकर खीर खिलावें आपकी मनोकामना पूर्ण होगी, वसुदेव कुटुंबकम एवं विश्व में शांति के लिए मंदिरों में भजन कीर्तन एवं सत्संग, विद्वानों, पंडितों एवं पुजारियों से अपने-अपने घरों में श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करावे, श्री राम रक्षा स्त्रोत एवं श्री दुर्गा चालीसा के साथ श्री रामचरितमानस के नवाह परायण पाठ के माध्यम से प्रार्थना की जाने की अपील धर्म संघ द्वारा की गई है।