UP के चित्रकूट में विभागीय फार्मासिस्ट जिले में अवैध कार्यों में संलिप्त, सीएमओ नहीं दे रहे ध्यान

Anchal Sharma
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चित्रकूट में स्वास्थ्य विभाग पर लगे लापरवाही के आरोप, मौन है प्रशासन

 

डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |

चित्रकूट जिले में स्वास्थ्य विभाग के भीतर ही नियमों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है। दूसरों को अस्पताल पंजीकरण और ईमानदारी का पाठ पढ़ाने वाले मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. भूपेश द्विवेदी के कथित दाहिने हाथ माने जाने वाले फार्मासिस्ट पंकज गोयल की गतिविधियों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खुद को बताते हैं डॉक्टर, बिना रजिस्ट्रेशन चला रहे ओपीडी

जानकारी के अनुसार फार्मासिस्ट पंकज गोयल स्वयं को डॉक्टर की तरह प्रस्तुत करते हुए मरीजों का इलाज कर रहे हैं। स्टेशन रोड स्थित अपने आवास पर बिना किसी वैध पंजीकरण के खुलेआम ओपीडी संचालित की जा रही है, जहां रोज़ सुबह-शाम सैकड़ों मरीजों का इलाज किए जाने का दावा किया जा रहा है।

नौकरी के साथ अवैध जांच केंद्र भी संचालित

आरोप है कि पंकज गोयल पिछले 15 वर्षों से सीएमओ कार्यालय के ठीक सामने खून जांच केंद्र चला रहे हैं। सरकारी नौकरी के साथ-साथ इसी केंद्र में बैठकर मरीजों का इलाज भी किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या फार्मासिस्ट को दवाओं का ज्ञान होने मात्र से एमबीबीएस डॉक्टर की उपाधि मिल जाती है?

अवैध कमाई बना सकती है बड़ी परेशानी

बताया जा रहा है कि इस कथित अवैध ओपीडी और जांच केंद्र से हुई कमाई का बड़ा ज़खीरा भविष्य में पंकज गोयल की मुश्किलें बढ़ा सकता है। इसके अलावा बेटे की एमबीबीएस पढ़ाई पूरी होने के बाद उसे भी विभाग में एंट्री दिलाने की जुगत में लगे होने की चर्चा है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले से अनजान है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है? क्या पंकज गोयल की अवैध ओपीडी पर जिला प्रशासन का शिकंजा कसेगा? क्या विकास प्राधिकरण से बिना नक्शा पास कराए चल रहे कथित अस्पतालों की सूची में गोयल का यह ठिकाना भी जिलाधिकारी की रडार पर आएगा?

जांच की मांग तेज

स्थानीय स्तर पर इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज होती जा रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस मामले पर संज्ञान लेता है और क्या वास्तव में स्वास्थ्य सेवाओं की साख बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

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