पशुओं का इलाज प्राइवेट गौ सेवकों द्वारा करवाने को ग्रामवासी हो रहे हैं मजबूर-आँचलिक ख़बरें-अजय पांडेय

News Desk
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सिंगरौली जिले में जिला पशु चिकित्सालय मे पदस्थ चिकित्सक के होने पर भी सुदूर ग्रामीण इलाके में पशुओं का इलाज प्राइवेट गौ सेवकों द्वारा करवाने को ग्रामवासी हो रहे हैं मजबूर।

जी हां हम बात कर रहे हैं सिंगरौली जिले मे इन दिनों गौ सेवकों के लिए सरकार द्वारा स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसमें आसपास के गांव में प्राइवेट तरीके से अपनी सेवाएं दे रहे चिकित्सकों को अच्छा प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार उपलब्ध करवाना ही सरकार का प्रथम उद्देश्य है।
शासन द्वारा स्वरोजगार प्रशिक्षण हेतु बैठक के दौरान सरकार की नई पहल समस्त प्राइवेट विटनेरी डॉक्टर को पशु चिकित्सालय मे रिक्त पदों को भरने हेतु इन प्रशिक्षित युवाओं को नियुक्त करने हेतु समस्त जिलों से प्राइवेट गौ सेवकों की सूची उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए थे।जिसके बाद गौ सेवक वेटनरी डॉक्टर द्वारा बताया जाता है कि सूची भेजने में काफी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। जिसके कारण कई दिनों से समस्त गौ सेवक ने कार्य बंद कर हड़ताल करने में लगे हुए हैं।वही दूर-दराज ग्रामीण अंचलों में रहने वाले पशुपालकों को प्रारंभिक उपचार, पशुपालन की जानकारी एवं पशुओं के रख-रखाव की जानकारी देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर गौ सेवकों की भर्ती की जाएगी। आवेदक को इसके लिए कम-से-कम 10 वीं पास, उसी ग्राम पंचायत का बी.पी.एल. कार्डधारी तथा परंपरागत पशुपालन का व्यवसाय करने वाले परिवार से होना चाहिए तथा उसकी आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसका चयन जनपद पंचायत स्तर पर किया जाएगा। चयनित गौ सेवकों को प्रशिक्षण केन्द्रों पर छ: माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा एवं इसके लिए एक हजार रूपये प्रतिमाह कुल 6 हजार रूपये प्रदाय किए जाएंगे। गौ सेवकों को एक हजार दो सौ रूपये की टूलकिट नि:शुल्क प्रदाय की जाएगी। प्रशिक्षित गौ सेवक प्रमाण-पत्र एवं पंजीयन के पश्चात पशुपालन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों के मार्गदर्शन में पशुपालन का कार्य कर सकेंगे।

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