मध्य प्रदेश में प्रकृति से संस्कृति का जीवंत उदाहरण बने नटेरन के कृषक धीरम दास बैरागी

Anchal Sharma
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vidisha news

डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |

विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता के मार्गदर्शन में विदिशा जिले में कृषि एवं कृषि से संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विकासखंड नटेरन के ग्राम सेऊ के कृषक धीरम दास बैरागी द्वारा अपनाई जा रही प्राकृतिक एवं जैविक खेती “प्रकृति से संस्कृति” की सोच को साकार करती दिखाई दे रही है।

जीवामृत से हुआ मृदा का प्रारंभिक उपचार

क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी राघवेंद्र अहिरवार को कृषक बैरागी ने बताया कि रबी मौसम में चने की फसल की बोनी से पूर्व खेत की तैयारी के दौरान जीवामृत से मृदा उपचार किया गया। इसके पश्चात प्राकृतिक विधि से बीजोपचार कर 2 हेक्टेयर क्षेत्र में चने की बोनी की गई।
पौधों की बेहतर बढ़वार एवं रस-चूसक कीटों के नियंत्रण हेतु कृषक द्वारा संजीवनी खाद का प्रयोग प्रत्येक 15 दिन के अंतराल पर किया जाता है। यह खाद 30 किग्रा नीम, 30 किग्रा गोबर, 3 किग्रा गुड़ एवं 63 लीटर पानी के मिश्रण से तैयार कर 15 दिनों तक धूप में रखी जाती है।

स्वनिर्मित जैविक कीटनाशक बने कीट प्रबंधन का आधार

कृषक बैरागी द्वारा इल्ली नियंत्रण हेतु नीम, सीताफल की पत्तियाँ, आक, हरी मिर्च, लहसुन एवं गौ-मूत्र के मिश्रण से स्वनिर्मित जैविक कीटनाशक तैयार किया गया है। साथ ही वे अपने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर समय-समय पर नए जैविक घोल एवं खाद का भी प्रयोग कर रहे हैं।

जैविक खेती से मिला बंपर उत्पादन

गत वर्ष खरीफ में कृषक द्वारा 2 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की जैविक खेती की गई, जिससे प्रति बीघा 12 क्विंटल (60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) की दर से कुल 120 क्विंटल धान का उत्पादन प्राप्त हुआ। यह जैविक खेती की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

देशी गौवंश बने जैविक खेती की रीढ़

जैविक खेती को सशक्त बनाने हेतु साहीवाल, राठी, गिर, नागौरी नस्ल की गायों एवं मुर्रा नस्ल की भैंस का पालन किया जा रहा है। पशुओं को प्राकृतिक रूप से उगाई गई नेपियर घास एवं चरी खिलाई जाती है, जिससे दुग्ध उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो रही है।
कृषक द्वारा अपनी गृह वाटिका में जैविक टमाटर की खेती भी की जा रही है, जिससे स्वयं के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण कृषकों को भी शुद्ध एवं सुरक्षित सब्जियां उपलब्ध हो रही हैं।

जनप्रतिनिधियों एवं विभागीय अधिकारियों का सहयोग के अलावा क्षेत्रीय जनपद सदस्य एडवोकेट अंशुज शर्मा तथा कृषि विभाग के सहयोग से ग्राम पंचायत स्तर पर जैविक खेती, नरवाई प्रबंधन एवं नैनो उर्वरकों के उपयोग संबंधी जागरूकता गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं, जिससे कृषकों को समय पर तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।

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