हिमाचल में बारिश बनी आफत: भूस्खलन से तबाही, पांच की मौत, स्कूल बंद, सड़कें ठप

Aanchalik Khabre
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Himachal pradesh

हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून का मौसम सिर्फ राहत नहीं, भारी मुसीबत लेकर आया है। सितंबर की शुरुआत तेज बारिश और भूस्खलन की ख़बरों के साथ हुई है। जगह-जगह मलबा गिरने से रास्ते बंद हो गए हैं, लोगों की जानें गई हैं, और सैकड़ों घरों को नुकसान पहुँचा है। राज्य में रेड अलर्ट जारी है, और हालात धीरे-धीरे गंभीर होते जा रहे हैं।

बारिश के बीच भूस्खलन: पांच लोगों की दर्दनाक मौत

राज्य में पिछले दो दिनों से लगातार तेज बारिश हो रही है। इसकी वजह से कई इलाकों में भूस्खलन हुए, जिनमें अब तक कम से कम पांच लोगों की मौत हो चुकी है। शिमला की जुंगा तहसील में एक घर भूस्खलन की चपेट में आ गया, जिसमें पिता और 10 साल की बेटी की मौत हो गई। पत्नी उस समय घर के बाहर थी, जिससे वह बच पाईं।

सिरमौर, जुब्बल-कोटखाई, और चौरास जैसे अन्य इलाकों में भी महिलाओं और युवतियों की जानें गईं। कहीं मकान गिर गए, कहीं मलबा पूरी गोशालाओं को बहा ले गया। लोगों को अचानक हुए हादसे में भागने तक का समय नहीं मिला।

सड़कों पर मलबा, स्कूलों में छुट्टी

राज्य में 793 सड़कें बंद हो चुकी हैं, जिनमें तीन राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं। पहाड़ों से मलबा और पत्थर गिरने से कई मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हैं। कई जगहों पर कारें मलबे में दब गई हैं। बिजली आपूर्ति भी बाधित है – 2174 ट्रांसफार्मर बंद हो गए हैं।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 11 जिलों के स्कूल और कॉलेज बंद करने के आदेश दिए हैं, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। शिमला, मंडी, कुल्लू, सिरमौर, ऊना, हमीरपुर, कांगड़ा, सोलन जैसे जिले सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं।

 कितने दिन और बरसेगा पानी? रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने 7 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। शिमला, सिरमौर, ऊना, सोलन, बिलासपुर, और कांगड़ा जैसे ज़िलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि अन्य जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट है। इसका मतलब है कि आने वाले कुछ दिन हालात और बिगड़ सकते हैं।

घर उजड़े, मवेशी दबे, खेत बर्बाद

परइया कलां (ऊना) में बारिश से एक घर के पांच कमरे और चार मवेशी मलबे में दब गए। हरिपुर (सोलन) में दो मंजिला मकान गिरने से चार लोग घायल हुए हैं। नौहराधार (सिरमौर) में एक महिला की मौत मलबे में दबने से हुई, वहीं उनके घर की गोशाला में 12 पशु मारे गए

ऐसी ही कई घटनाएं राज्य भर से सामने आ रही हैं, जहां लोगों की उम्रभर की कमाई और आशियाने कुछ ही मिनटों में धराशायी हो गए। कई किसान परिवारों के खेत और मवेशी भी इस कहर की चपेट में आए हैं।

रिकॉर्डतोड़ बारिश: अगस्त में टूटा 10 साल का रिकॉर्ड

इस बार अगस्त में बारिश ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। कुल्लू में 473 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो अब तक का सबसे ज्यादा है। पूरे हिमाचल में अगस्त में औसतन 72% ज्यादा बारिश हुई। 24 से 31 अगस्त के बीच ही कई जिलों में सामान्य से 291% अधिक वर्षा हुई है।

संपत्ति का नुकसान और जानमाल की क्षति

राज्य सरकार के अनुसार, 320 लोग इस मानसून सीजन में जान गंवा चुके हैं। इनमें से 154 की मौत सड़क हादसों में हुई, जबकि बाकी की मौत बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं में हुई। 3056 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हो चुका है।

4569 घर और दुकानें आंशिक या पूरी तरह टूट चुकी हैं। 1885 पालतू पशुओं की मौत और 3710 गोशालाएं नष्ट हो चुकी हैं।

शिक्षकों की प्रमोशन पर भी बारिश का साया

राज्य में हाल ही में जिन 642 शिक्षकों को प्रमोशन मिला था, वे बारिश और बंद सड़कों के कारण अपनी नई पोस्टिंग पर जॉइन नहीं कर सके। 28 महीने की लंबी प्रतीक्षा के बाद मिली यह खुशखबरी भी अब अनिश्चितता के बादल में घिरी हुई है।

संघ के पदाधिकारियों ने सरकार से अपील की है कि जॉइनिंग की तारीख बढ़ाई जाए, ताकि सभी शिक्षक सुरक्षित स्कूल तक पहुँच सकें।

बर्फबारी से बढ़ी ठंड, मनाली-लेह हाईवे बंद

लाहौल और कुल्लू की ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी हुई है। इससे शिंकुला दर्रा सफेद चादर में ढक गया है। पागलनाला में बाढ़ आने से मनाली-लेह मार्ग एक बार फिर से बंद हो गया है। इससे पर्यटन पर भी असर पड़ा है और स्थानीय लोग आवाजाही में परेशानी झेल रहे हैं।

मुख्यमंत्री का संदेश: सतर्क रहें, मदद करें

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में स्थिति की समीक्षा की और कहा कि सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें, नदी-नालों के पास न जाएं और जरूरतमंदों की मदद करें।

उन्होंने प्रशासन को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

घर दरकने लगे, लोग दहशत में

शिलाई, सगड़ाह, और शिमला के आसपास के इलाकों में कई घरों में दरारें आ गई हैं। लोग अपने ही घरों में डर-डर कर रह रहे हैं। रिठोग गांव में चार मकानों को खाली कराने की नौबत आ गई है।

अगर बारिश नहीं थमी, तो हमें गांव छोड़ना पड़ेगा,” एक स्थानीय निवासी ने कहा।

 

प्रकृति की चेतावनी, मानवीय संवेदनाएं ज़रूरी

हिमाचल की ये भारी बारिश और भूस्खलन सिर्फ मौसम की कहानी नहीं है – यह लोगों की जिंदगी का संकट है। हमें समझना होगा कि जलवायु परिवर्तन और बेतरतीब निर्माण से यह स्थिति और बिगड़ती जा रही है।

अब वक्त आ गया है कि हम केवल “आपदा के बाद राहत” से आगे बढ़ें और “आपदा से पहले बचाव” की सोच अपनाएं। इस मुश्किल समय में हमें एक-दूसरे का सहारा बनना है, क्योंकि हिमाचल के लोग अभी संघर्ष के दौर से गुजर रहे हैं।

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