एकेंद्रीय आदि सभी इंद्रियां पाई पर संयम का पालन नहीं कर सकते । सभी में असंयमी रहा । जीव को असंयम ही अच्छा लगता है । उसे संसार में रहने का अभ्यास ज्यादा है । संसार से वह निकलना नहीं चाहता है । जीव संसार रूपी समुद्र में डूब रहा है, पहले बाहर निकलना है फिर उसमें से संसार निकालना है ।पर वह पानी में ही डूबे रहता है ।धर्म संयम में ही सुलभ है ।व्यक्ति अवज्ञा के कारण भी धर्म नहीं कर पाता है। गुरु से ज्यादा मैं ज्ञानी हूं ऐसा वह मानता है, उसे जाति ,पद का अभिमान है । रोष के कारण भी धर्म छूटता है। घर का कोई सदस्य दीक्षा लेना चाहे, सामने से साधु को आता देखे तो उसे रोष आ जाता है । रोष करने वाले ज्यादा होते हैं । प्रमाद के कारण भी जीव विषय विकारों, मौज मस्ती, भोग कषाय में रहकर धर्म से दूर रहता है । जीव धर्म कम करता है, पर मोक्ष में जाने की पूरी इच्छा रखता है पर संयम लेना नहीं चाहता है । वह भय, डर के कारण भी संत के पास नही जाता कभी वे धन देने की बात तो नहीं करें ,प्रत्याख्यान करा देवें यह भी डर रहता है । गुरु डराते हैं कि धर्म नहीं करेगा तो नरक में जाएगा, ऐसा डर मन में रहता है ।व्यक्ति घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर सवा माह तक शोक के कारण धर्म करना बंद कर देता है, साधु धर्म बंद नहीं करते हैं ।अज्ञान ,व्यस्तता के कारण भी जीव धर्म कम करता है । घर ,दुकान के कार्य में व्यस्त रहता है । रहे काम रावण से भी नहीं हुए तो कब पूरे करेंगे? साधु अपने सांसारिक परिजनों के यहां कोई प्रसंग आने पर नहीं जाते हैं। कोतूहल के कारण भी व्यक्ति धर्म से दूर रहता है । फिल्म, सर्कस, क्रिकेट मैच, दंगल एवं अन्य मनोरंजन कार्यों में समय ज्यादा देता है। धर्म यदि ह्रदय में उतरा हुआ है, तो व्यक्ति धर्म को प्राथमिकता देता है । आज धर्म सभा में अंकलेश्वर, लिमडी, रतलाम, बेटमा राजपुर, मेघनगर आदि स्थानों के दर्शनार्थी दर्शन हेतु पधारे ।राजपुर की श्रीमती संगीता लोढा एवं श्रीमती वंदना लोढ़ा जो लघु सर्व भद्र तप कर रही है वह भी धर्म सभा में पधारी । गुरुदेव ने उन्हें धन्यवाद दिया तथा खूब-खूब अनुमोदना की । तपस्या के दौर में आज सुधीर रूनवाल ने 31, कुमारी सोनीका बरबेटा ने 26, श्रीमती सीमा व्होरा ने 25 ,श्रीमती सीमा गांधी ने 19 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए । बड़ी संख्या में तपस्वी सिद्ध भक्ति तप भी कर रहे हैं ।प्रवचन का लेखन श्री सुभाष चंद्र ललवानी ने किया सभा का संचालन प्रदीप रूनवाल ने किया ।

