आरोन में पुलिस कर्मियों के हत्या में शामिल शिकारियों का एनकाउंटर स्वागत योग्य,
देश में यदि कानून का राज है तो सरकार के मुखिया व मंत्री बयानबाज़ी बन्द कर अपराधियों पर शिकंजा कसकर प्रदेश में कानून व्यवस्था कायम करें
मध्यप्रदेश में भाजपा के 18 सालों के शासनकाल में ध्वस्त हो चुकी कानून व्यवस्था और लचर प्रशासनिक व्यवस्था की वजह से न केवल आम नागरिक परेशान हो रहे हैं बल्कि सुरक्षा देने वाली पुलिस स्वयं ही बेखौफ शातिर बदमाशों और माफियाओं का शिकार बनती जा रही है। जिस तरह इंटेलिजेंस फेलियर की वजह से खरगोन शहर दंगे की आग में झुलस कर रह गया और उसी दौरान पुलिस अधीक्षक के पैरों में लगी गोली ने खुद ही कानून व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी थी तो उसी तरह गुना जिले के आरोन के जंगल में शिकारियों के हौसले इतने बुलंद हो गए थे कि उन्होंने बिना किसी डर के पुलिस कर्मियों पर गोली बारी करने का न सिर्फ दुस्साहस किया अपितु इस मुठभेड़ में तीन कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मियों को जान से हाथ धोना पड़ा।
इस पूरे घटना क्रम के दौरान दो बातें स्पष्ट तौर पर दिखाई दी एक, भाजपा शासन काल में अपराधियों में पुलिस का भय नही है और दूसरी बात, पुलिस कर्मियों और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच समन्वय नही के बराबर था। बल्कि शिकारियों को इतना मजबूत राजनैतिक संरक्षण प्राप्त था कि वे बेझिझक होकर पुलिस पर गोली चलाने पर आमादा हो गए थे।
सवाल यही है कि आखिर आईजी पुलिस घटना की जानकारी होने पर तुरंत घटना स्थल पर क्यों नही पहुंचे? उन्हें घटना स्थल पर नही पहुंचने के लिए कौन सी परिस्थिति विवश कर रही थी? पुलिस का अतिरिक्त बल सहयोग के लिए क्यों नही पहुंचा? वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कहाँ गायब थे? एसपी व डीएफओ पर कार्यावाही क्यों नही की गई? ये ज्वलंत सवाल आज समूचे प्रदेश के लोगों के मन में हैं और ये प्रश्न सबसे ज्यादा उन लोगो के मन में उठ रहे हैं जिनके बेटे पुलिस के जवान इस पूरी जर्जर कानून व्यवस्था का शिकार होकर मौत के मुंह में समा गए।
कांग्रेस पार्टी का सीधा आरोप है कि जिस शहज़ाद ने पुलिस पर 8 राउंड फायर किए और जो मुख्य अभियुक्त था उसको मध्यप्रदेश सरकार के पंचायत मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया और भाजपा के गुना जिले के उपाध्यक्ष हीरेन्द्र सिंह उर्फ बंटी बना का खुला संरक्षण प्राप्त था। एनकाउंटर में मार गिराए गए शहज़ाद के साथ जिस तरह से पंचायत मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया और भाजपा के गुना जिले के उपाध्यक्ष हीरेन्द्र सिंह बंटी बना की तस्वीरें सामने आ रही है इससे इस बात से इनकार नही किया जा सकता कि मंत्री सिसोदिया और बंटी बना की भी राष्ट्रीय पक्षी मोर व काले हिरण को मारकर उनके मांस, खाल व सींगों की तस्करी में संलिप्तता हो? शायद इसी वजह से पुलिस के आला अधिकारियों ने त्वरित रूप से कोई भी एक्शन लेना उचित नही समझा?
इस मामले में सत्ताधारी दल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को सरकार की नाकामी ढांकना थी तो उन्होंने झूठ बयानी करते हुए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह जी का नाम बीच में लाकर सरकार को बचाना चाहा लेकिन साँच को आंच नही उलट भाजपा के लोगों की हीं इन दुर्दान्त अपराधियों के साथ तस्वीरें सामने आ गईं जिन्होंने वीडी शर्मा के दावों की हवा निकाल कर रख दी। जो तस्वीरें हम आपको देने वाले हैं वे यही बयां कर रही हैं कि तस्करी करने वाले गिरोह के लोगों को जिस तरह का संरक्षण मंत्री सिसोदिया व हीरेन्द्र सिंह बंटी बना का था उससे जंगली जानवरों की तस्करी से मिलने वाली रकम में भी हिस्सेदारी होने की संभावना को नकारा नही जा सकता इसलिए इस पूरे मामले की जांच की जाकर अपराधियों को संरक्षण देने वालों पर भी कठोरतम कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए।
कांग्रेस का ये मानना है कि इस गंभीर आपराधिक प्रकरण की वास्तव में न्यायायिक जांच होनी चाहिए क्योंकि जिस तरह हत्यारे शिकारी शहज़ाद व अन्य को मंत्री सिसोदिया व हीरेन्द्र बंटी बना का संरक्षण प्राप्त था उसी तरह मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया व बंटी बना को केंद्रीय विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का खुला संरक्षण है, इसीलिए ये मामला हाई प्रोफाइल हो जाता है जिसकी उच्च स्तरीय न्याययिक जांच होना आवश्यक है।
हमें यकीन ही नही पूरा विश्वास है कि अपराधियों के तार भाजपा नेताओं के साथ जुड़े हैं इसीलिए कांग्रेस पार्टी पुरजोर तरीके से सरकार से मांग करती है कि पुलिस कर्मियों के जघन्य हत्याकांड में शामिल सभी शिकारियों की बीते एक माह से घटना दिनांक तक की कॉल डिटेल सार्वजनिक करना चाहिए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि इन हत्यारों का किन लोगों से सतत संपर्क था और उन्हें किसका संरक्षण प्राप्त था।
आरोन मामले से उजागर हो चुकी प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह व मीडिया प्रभारी श्री केके मिश्रा की संयुक्त पत्रकार वार्ता-आंचलिक ख़बरें-मनीष गर्ग

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