भवन का दक्षिणी छोर हल्की बारिश में हुआ धराशाई,निर्माण कार्य में दिखी बड़ी लापरवाही
सिंगरौली/देवसर- शासकीय महाविद्यालय देवसर के ठीक बगल में नवीन भवन का निर्माण कराया जा रहा है।जहां बिजौरा वासियों के बच्चों के साथ-साथ देवसर नगर के आसपास के भी बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इसी निर्माणाधीन भवन में आगे चलकर पठन-पाठन का कार्य करेंगे।सवाल तो यह उठता है कि दो से तीन मंजिला बनने वाला यह भारी-भरकम भवन लगभग 2 मंजिल बनकर तैयार हो गया है।वहीं निर्माणाधीन भवन का काम अभी भी चल रहा है।दरअसल हुआ यूं कि हल्की बारिश होने की वजह से जो कार्य किए जा चुके हैं और जिसकी लगभग पुताई भी की जा चुकी है,वही धराशाई होने लगे हैं।मामला तब प्रकाश में आया जब भवन का दक्षिणी छोर हल्की बारिश में ही भरभरा कर गिर गया।और भी मामला दिलचस्प तब हुआ जब मौके वारदात पर पहुंचकर उसके गिरने का कारण पूछा गया।हालांकि वास्तविक कारण मौजूद वहां सभी कर्मियों ने बताने में आनाकानी की लेकिन जो दिखा मैंने लिखा।करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाला भवन मूर्त रूप लेने के पहले ही दम तोड़ता हुआ नजर आया।आखिरकार जब अभी से इस भवन का यह हाल है तो भला कैसे यकीन किया जाए कि पूरी की पूरी बिल्डिंग पूरी ईमानदारी से बनाई गई होगी।इतना ही नहीं इस भवन के नीचे आने वाले समय में हजारों विद्यार्थी पठन-पाठन का कार्य करेंगे और उनके ऊपर भी खतरा मंडराता रहेगा।गुणवत्ता विहीन भवन कि कोई खोज खबर तक लेने वाला नहीं।क्या देश के भविष्य कहे जाने वाले विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों के साथ इसी प्रकार से निर्माण एजेंसियों द्वारा खिलवाड़ किया जाता रहेगा।या फिर विकास के नाम पर गुणवत्ता केवल कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगी।निर्माण एजेंसी द्वारा कराए जा रहे उक्त भवन निर्माण की जांच जिम्मेदारों द्वारा समय रहते किये जाने हेतु स्थानीय जनों ने मांग किया है।
प्रथम तल के छत ज्वाइंटिंग से भी पसीज रहा पानी
नवीन भवन का प्रथम तल तैयार होकर लगभग दूसरे तल का भी काम पूरा होने के कगार पर है।हल्की बारिश ने उक्त बिल्डिंग की एक और भी पोल खोलती हुई दिखाई दी।जहां प्रथम तल के छत की ज्वाइंटिंग में दरारें होने की वजह से पानी पसीज रहा है।वहीं निर्माण कार्य में भी बड़ी लापरवाही दिखाई दे रही है।
भस्सी का भी खुलेआम निर्माणाधीन भवन में किया जा रहा उपयोग
निर्माणाधीन भवन में खुलेआम भस्सी का भी उपयोग किया जा रहा है। आखिरकार भस्सी में कौन से ऐसे गुण हैं जो करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाले भवन में ना लगे तो वह कमजोर हो जाएगा।काली भस्सी उपयोग कहां किया जा रहा है यह भी अपने आप में बड़ा सवाल है।
श्रमिकों के सेफ्टी का नहीं है कोई उचित प्रबंधन
निर्माणाधीन भवन में ऐसा भी मामला प्रकाश में आया कि जो श्रमिक उक्त जब वह दिखाई नहीं दी।निर्माणाधीन भवन के काम में लगे सभी श्रमिक बिना सेफ्टी के ही काम करते हुए नजर आए।सवाल तो यहां भी यह उठता है कि क्या उक्त भवन निर्माण कार्य में लगी एजेंसी को श्रमिकों की तनिक भी परवाह नहीं है।या फिर यह कहा जाए कि निर्माण एजेंसी भी सांठगांठ कर अपने मनमाफिक कार्य करा रही है जिस पर कोई अंकुश लगाने वाला नहीं है।जिसकी वजह से श्रमिकों के साथ भी निर्माण एजेंसी द्वारा लापरवाही बरती जा रही है।खैर अब देखना यह होगा कि क्या उक्त निर्माणाधीन भवन पर जिम्मेदारों की नजर पड़ती है या फिर घटिया किस्म का काम एवं मजदूरों के साथ ऐसा ही अन्याय आगे भी मौजूदा निर्माण एजेंसी द्वारा किया जाता रहेगा।