हम इक्कीस वर्ष पहले सजग रहते तो आज सिहोरा जिला इक्कीस वर्ष का होता
जिला जबलपुर – वर्ष 2001 में पहली बार जब सिहोरा जिला घोषित हुआ और इसके बाद समस्त विभागीय प्रक्रिया भी पूर्ण हो गई तो भी सिहोरा जिला मूर्त रूप में नही आ सका।इसका कारण जहाँ तत्कालीन सरकार और जनप्रतिनिधियों का गंभीर न होना था वही सिहोरा वासियो का सजग न होना भी एक महत्वपूर्ण कारण था।लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने अपने धरने में सिहोरावासियों से आह्वान किया कि वे सिहोरा जिला के लिए आगे आए।
ये है सिहोरा जिला का इतिहास:-
21 अक्टूबर 2001 को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने सिहोरा जिला घोषित किया
11 जुलाई 2003 को सिहोरा जिला का राजपत्र जारी हुआ।
01 अक्टूबर 2003 को म प्र सरकार की कैबिनेट ने सिहोरा जिला को मंजूरी दी
आचार संहिता में सरकार ने निर्णय लिया कि 26 जनवरी 2004 से सिहोरा जिला लागू होगा
5 जून 2004 को तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती ने नवंबर 2004 से सिहोरा जिला अस्तित्व में आने की घोषणा की
21 वर्ष बीते जिला न बना सिहोरा:- समिति के नागेंद्र क़ुररिया,राजभान मिश्रा,रामजी शुक्ला ने कहा कि आज 21 वर्ष बीत जाने के बाद भी सिहोरा की स्थिति जस की तस है।किसी भी जनप्रतिनिधि और सरकार सिहोरा जिला के प्रति गंभीरता नही दिखाई।
समिति के 59 वें धरने में अमित बक्शी,कृष्णकुमार क़ुररिया,सुशील जैन,नत्थू पटेल,रामलाल यादव,पन्नालाल सहित अनेक सिहोरावासी मौजूद रहे।