प्रदेश में पहला पायलेट प्रोजेक्टर आदिवासी बाहुल्य जिले में नवाचार के माध्यम से, जिला प्रशासन द्वारा महिलाओं को पिरियड फ्रेन्डली वातावरण प्रदान करने हेतु, मिशन महिमा का शुभारंभ किया.
28 मई विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर, झाबुआ में विभिन ग्रामो से आयी स्वयं सहायता समूह की सदस्यों, किशोरी बालिकाओ और विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओ के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ‘मिशन महिमा’ का शुभारम्भ किया गया. यह कार्यक्रम जिला कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी की अध्यक्षता में यूनिसेफ और, अन्य सहयोगि संस्थाओ अनहिबिटेड, ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन , ऍलआईसी के अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ. ‘मिशन महिमा’ आदिवासी बहुल जिले में मासिक स्वास्थ्य स्वच्छता प्रबंधन की सुविधा के लिए, एक विशिष्ट पहल है। जिसका उद्देश्य जनजातीय समुदायों की क्षमता निर्माण के साथ, झाबुआ को “मासिक धर्म फ्रेंडली“ जिले के रूप में स्थापित करना है और, मासिक धर्म स्वच्छता से संबंधित बेहतर प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
सोमेश मिश्रा (आईएएस), कलेक्टर झाबुआ, द्वारा मिशन का शुभारंभ किया गया। । नागेश पाटीदार, वॉश ऑफिसर, यूनिसेफ मध्य प्रदेश, जीतेन्द्र सीनियर मैनेजर टीआरआईएफ, सुश्री स्वाति अनहिबिटेड, सुश्री पूनम मराठा एलआईसी, एवं जे. पी. एस. ठाकुर सीएमएचओ झाबुआ द्वारा माहवारी प्रबंधन और स्वच्छता के विभिन्न विषयों पर उद्बोधन दिया गया । व्य्कत्यों में यह कहा गया की मिशन के तहत लिए गए रणनीतिक हस्तक्षेप को जन जन तक पहुचाने हेतु जमीनी कार्यकर्ताओ को गहन रूप से प्रशिक्षित करना होगा जो समुदायों में माहवारी प्रबंधन से संबंधित मुख्य बातों को जन जन तक पहुचाएंगे और सुविधा प्रदान करेंगे। इस कार्यक्रम में विकसित मॉड्यूल मासिक धर्म सुधार में बाधा डालने वाले मुद्दों पर गहराई से चर्चा करेंगे और समुदे में इससे जुडी भ्रांतियों को देय करेंगे । मासिक धर्म के सभी पहलुओं जैसे वर्जनाओं और मिथकों को खत्म करने, सैनिटरी नैपकिन और अन्य उत्पादों के उपयोग के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला और सुरक्षित निपटान तंत्र को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एलआईसी इंडिया द्वारा सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन प्रदान कि गई । सोमेश मिश्रा (आईएएस), जिला कलेक्टर, झाबुआ ने कहा, “मैं झाबुआ में इस अभिनव पहल मिशन महिमा का हिस्सा बनकर बहुत खुश हूं। इस पहल ने एक ऐसे विषय पर विशेष ध्यान दिया है जिसे अभी भी एक वर्जित माना जाता है और बहुत सारे मिथकों से घिरा हुआ है। मैं कोविड 19 के समय में उल्लेख करना चाहूंगा, जब मैंने टीम के साथ लोगों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करने और प्रेरित करने के लिए सफल प्रयास किए। इसी तरह झाबुआ में भी हम इस मिशन को फिर से सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे और इसे सभी के लिए सफल बनाएंगे। मैं कहूंगा कि आप सभी महिलाएं और किशोरी बालिकाए सभी के लिए नेतृत्व और प्रेरणा हैं। मैं उन सभी सहयोगी और कार्यान्वयन भागीदारों , संस्थाओ को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने (एमएचएम) के कार्य को आगे बढ़ाया और इसके सफल शुभारम्भ में सहयोग दिया । उन्होंने आव्हान किया की झाबुआ को एक अवधि के अनुकूल जिला बनाने और इसे मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन में एक शोकेस मॉडल के रूप में विकसित करने का संकल्प लें। इस कार्यक्रम में 300 से अधिक एसएचजी महिलाओं, किशोरियों और नागरिक समाज संगठनों ने भाग लिया। झाबुआ सही ज्ञान प्रदान करने, वर्जनाओं को दूर करने, सैनिटरी एब्जॉर्बेंट्स की आपूर्ति श्रृंखला, अवधि के अनुकूल वाश सुविधाओं और निपटान प्रणालियों से शुरू होने वाली व्यापक मासिक धर्म स्वच्छता सेवा श्रृंखला को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण आविष्कार के साथ मासिक धर्म स्वच्छता यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए योजना के साथ अच्छी जगह है।