ग्रामीण कौशल योजना के प्रशिक्षण से मिली नौकरी,परिवार हुआ खुशहाल-आंचलिक ख़बरें- रमेश कुमार पाण्डे

News Desk
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जिला कटनी – ग्रामीण आजीविका मिशन के दीनदयाल ग्रामीण कौशल योजना से प्रशिक्षण लेकर मनीषा यादव अब आई.सी.ए. एजुकेशन भोपाल जैसी प्रतिष्ठित कंपनी मे 18 हजार रुपये से अधिक के वेतन पर सेवाएं दे रही हैं। यह दास्तान है जिले के दूरांचल जनपद पंचायत ढीमरखेडा के ग्राम परसेल की रहने वाली सुश्री मनीषा यादव की। जिनका बचपन अभावो में गुजरा मनीषा की कुल 06 बहने हैं, जिनमे मनीषा सबसे बड़ी है। जैसे-जैसे समय बीतता गया और मनीषा अपनी 12वी तक की पढाई पूरी करने के बाद आगे की रेगुलर पढाई के लिए न तो घर में पर्याप्त सुविधा थी और न ही पैसे। पिता कृषक एवं माता गृहणी होने के कारण परिवार के पास आय का एक मात्र साधन कृषि था। जिससे परिवार का भरण पोषण होता था। मनीषा को ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा आयोजित जन जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयूजीकेव्हाई) योजना के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। मनीषा को सदैव यह स्मरण रहा की घर की बड़ी बेटी होने के कारण यदि मैं आय का कोई स्रोत नहीं बनाती तो अन्य छोटी 05 बहनों की पढाई-लिखाई पर इसका प्रभाव पडेगा तथा छोटी बहनों को शिक्षा प्राप्त नही हो सकेगी।WhatsApp Image 2023 01 10 at 7.20.31 PM
मनीषा जब डी.डी.यू.जी.के.व्हाई. क्वेश क्राप प्रा०लि० मण्डी-दीप भोपाल प्रशिक्षण हेतु जाने लगी तब गाँव के ही लोगों द्वारा तरह-तरह के ताने माता-पिता को देने लगे। किन्तु मनीषा के माता-पिता ने किसी की नही सुनी तथा जो मनीषा को उपयुक्त लगा वही करने दिया। मनीषा मेहनती और लगनशील होने के कारण एक बार भी पीछे मुड़ कर नही देखा। मनीषा 06 माह का प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत नौकरी हेतु जब स्नाइदर इलैक्ट्रिक हैदराबाद हवाई जहाज से गई तो गांव के वे लोग जो मनीषा के माता-पिता को ताने देते थे वही लोग अब घर पर आकर माता-पिता को बधाई देते है एवं प्रशंसा करते है। मनीषा की पहले ज्वाईनिंग स्नाइदार इलैक्ट्रिक प्रा०लि० हैदराबाद में इलैक्ट्रिक हेल्पर के रूप हुई। एक वर्ष कार्य का अनुभव होने पर अब आईसीए एजूकेशन भोपाल में ट्रेनर के रूप में 18 हजार 423 रूपये प्रति माह पर अपनी सेवाये दे रही है।
मनीषा का ही नही बल्कि गांव के लोग माता-पिता को भी सम्मान के साथ आदर करते है। मनीषा अपने खर्चों से पैसा बचाकर जो पैसा घर भेजती है, उससे परिवार के खर्चे एवं बहनों की पढ़ाई पर खर्च किया जाता है। मनीषा तथा इनके माता-पिता खुशहाल है तथा बेटी की उपलब्धि पर गर्व करते है।

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