68 लाख डिजिटल हेल्थ कार्ड बने पर मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री गायब 1.75 = शरीर कारण : मप्र में सिर्फ 28 डॉक्टर ही डिजिटल हेल्थ मिशन में रजिस्टर्ड-आंचलिक ख़बरें-मनीष गर्ग

News Desk
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डिजिटल हेल्थ कार्ड : मरीज की सभी जांच, एक्स-रे, रिपोर्ट, दवाइयां, डिस्चार्ज समरी अपलोड रहती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2020 को नेशनल डिजिटल हेल्थ
मरीजों को अपने इलाज की पुरानी फाइलें साथ मिशन का ऐलान किया था। इसके तहत लोगों के डिजिटल हेल्थ कार्ड लेकर चलने की झंझट से छुटकारा दिलाने के लिए शुरू की गई डिजिटल हेल्थ आईडी (कार्ड) नार योजना मध्यप्रदेश में एक साल में भी ठीक से लागू नहीं हो पाई है। प्रदेश में अब तक 68 लाख लोग डिजिटल हेल्थ आईडी बनवा चुके हैं, लेकिन जब वे इलाज के लिए अस्पताल शनिवार पहुंचते हैं तो वहां उनकी आईडी से कोई भी नरीक्षक जानकारी डिस्प्ले नहीं हो रही है। डॉक्टरों को मेवाड़ा मेडिकल हिस्ट्री बताने के लिए उन्हें पुरानी फाइलें पए की ही लेकर जाना पड़ रहा है। दरअसल, यह कार्ड ने कल उन्हीं स्वास्थ्य सुविधाओं और उन्हीं डॉक्टरों उन्होंने के पास एक्सेस होगा, जिनका डिजिटल हेल्थ का 9वां स्थान, आंध्रप्रदेश टॉप पर जयत में मिशन में रजिस्ट्रेशन हुआ है। मप्र में अब तक दिनों 711 डॉक्टरों ने रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई किया कराने है, इनमें से सिर्फ 28 को रजिस्टर्ड किया गया है। जबकि आंध्रप्रदेश में 7357, चंडीगढ़ में 1698, जम्मू-कश्मीर में 1210 रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। प्रदेश में अब तक मात्र 2382 स्वास्थ्य सुविधाओं को रजिस्टर्ड किया गया है। जबकि 4123 एप्लीकेशन पेंडिंग हैं। यूपी में 26,824, आंध्रप्रदेश में 13, 371, पश्चिम बंगाल में 10,221 और न दर्शन महाराष्ट्र में 9682 स्वास्थ्य सुविधाएं रजिस्टर्ड हैं।

बनाए जाने थे। कार्ड के लिए संबंधित व्यक्ति का 14 अंकों का यूनिक डिजिट हेल्थ आईडी बनता है। इस लॉकर में उस व्यक्ति का पूरा हेल्थ रिकार्ड जैसे जांचें, एक्सरे, रिपोर्ट, दवाईयां, डिस्चार्ज समरी सहित संबंधित जानकारी अपलोड की जाती है। इसका फायदा यह है कि जरूरत पड़ने पर डॉक्टर उस व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री ऑनलाइन देख सकते हैं। मरीज को इन दस्तावेजों की फाइल साथ
रखने की जरूरत नहीं है। डिजिटल कार्ड बनाने के मामले में मध्यप्रदेश
मप्र में पिछले एक साल में 68 लाख लोग डिजिटल हेल्थ कार्ड बनवा चुके हैं। पहले यह काम नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के के पास था, अब इसे आयुष्मान भारत के अंतर्गत डिजिटल मिशन की सौंप दिया गया है। डिजिटल कार्ड बनाने के मामले में मध्यप्रदेश का देश में 9वां स्थान है। सबसे ज्यादा 2 करोड़ 82 लाख कार्ड आंध्रप्रदेश में बने हैं। बिहार में 1 करोड़ 47 लाख, महाराष्ट्र में 1 करोड़ 43 लाख केरल में 1 करोड़ 28 लाख यूपी में 1 करोड़ 27 लाख और पश्चिम बंगाल में 1 करोड़ 10 लाख कार्ड बन चुके हैं।

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