कोरोना संकट के बीच चुनाव आयोग द्वारा 8 जनवरी को आखिरकार देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर ही दिया गया। इन पांच राज्यों में सात चरणों में चुनाव कराएं जाएंगे।देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण का चुनाव 10 फरवरी को होगा। वहीं पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में में एक ही चरण में 14 फरवरी को चुनाव कराए जाएंगे। जबकि मणिपुर में दो चरणों में 27 फरवरी और 3 मार्च को मतदान होगा। पांचों राज्यों में 7 मार्च को मतदान खत्म हो जाएगा और 10 मार्च को मतगणना की जाएगी। उत्तर प्रदेश में क्रमशः 10 फरवरी, 14 फरवरी, 20 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी, 3 मार्च, और 7 मार्च को मतदान होगें। उत्तर प्रदेश में विधानसभा का कार्यकाल 14 मई को, उत्तराखंड और पंजाब का कार्यकाल 23 मार्च को जबकि गोवा विधानसभा का कार्यकाल 15 मार्च को और मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 19 मार्च को समाप्त हो रहा है।
जाहिर है चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तिथियों की घोषणा के साथ ही पांचों राज्यों में सभी राजनीतिक पार्टियों की चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी पार्टियां अपने वरीय नेताओं के साथ विचार विमर्श करके विजयी उम्मीदवारों का चयन करने में जुट गई है। कोरोना संकट को देखते हुए चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार के लिए डिजिटल, वर्चुअल, मोबाइल जैसे प्लेटफार्म को ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने को कहा है। फिजिकल प्रचार के पारंपरिक साधनों का इस्तेमाल कम से कम करने को कहा है। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चुनाव आयोग द्वारा पांच राज्यों में चुनाव की तिथियों की घोषणा किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि मैं भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं से आग्रह करता हूं कि चुनाव आयोग द्वारा बताई गई कोविड प्रोटोकॉल और अन्य सभी गाइडलाइन का पालन करते हुए, पूरी ताकत से लोकतंत्र के इस महापर्व में भाग लें। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले चुनावों में भाजपा को फिर से जनता का आशीर्वाद मिलेगा। भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी और सेवा एवं विकास के कार्यों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
वैसे इन राज्यों में किन राजनीतिक दलों को जीत हासिल होगी, फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह चुनाव देश की वर्तमान सियासत पर एक तरह से जनमत संग्रह होंगे। दरअसल, पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। इसके साथ ही पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे देश के अगले राष्ट्रपति चुनाव में भी काफी अहम होने वाले हैं। क्योंकि जुलाई माह में संभावित राष्ट्रपति चुनाव में इन पांच राज्यों के नवनिर्वाचित विधायक अहम रोल अदा करेंगे।
इन पांच राज्यों के नतीजे ना सिर्फ 690 विधायकों के भविष्य का फैसला करेंगे, बल्कि 19 राज्यसभा के सांसदों की भी सीट खाली हो रही है उनके चयन में भी यह नतीजे अहम रहने वाले हैं। बता दें कि चुने हुए विधायक और सांसद ही राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लेते हैं, ऐसे में जिस पार्टी के पास सबसे अधिक विधायक और सांसद होते हैं उसके उम्मीदवार के राष्ट्रपति चुनाव जीतने की संभावना अधिक रहती है।
अगर भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में चुनाव जीतने में विफल रहती है तो भाजपा के लिए अपनी पसंद का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार जीता पाना मुश्किल होगा। 2017 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने आसानी से जीत दर्ज की थी और यूपी में 403 में से 325 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि उत्तराखंड में 70 में से 57 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
यही वजह है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने आसानी से अपने उम्मीदवार को राष्ट्रपति चुनाव में जीत दिलाने में सफलता हासिल की थी। उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक विधायक चुनकर आते हैं, यही वजह है कि यहां सबसे अधिक इलेक्टोरल कॉलेज है, जिसकी वजह से राष्ट्रपति चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश के नतीजे काफी अहम है।
मौजूदा समय की बात करें तो पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, झारखंड, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान और दिल्ली में विपक्षी दलों की सरकार है। लेकिन यहां क्षेत्रीय दलों की सरकार है और ये राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए विपक्ष को अपना समर्थन दे सकते हैं, बशर्ते विपक्ष एक ऐसे उम्मीदवार को उतारे जो हर किसी की पसंद हो।
ऐसी स्थिति में 690 विधानसभा सीटें जिनमे यूपी की 403, पंजाब की 117, उत्तराखंड में 70, मणिपुर में 60, गोवा की 40 सीटें हैं। वहीं राज्यसभा में उम्मीदवारों की संख्या इन राज्यों में चुनाव पर निर्भर है। राज्यसभा की 75 में से 73 सीटें इस साल खाली होने जा रही हैं। अप्रैल, जून और जुलाई माह में इन सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। जाहिर है जिस दल के पास अधिक विधायक होंगे उनके ही उम्मीदवार इन खाली हो रहे राज्यसभा सीटों पर जीत दर्ज करने में सक्षम होंगें और राष्ट्रपति चुनाव में अहम भूमिका अदा करेंगे।
“देश की राजनीति में बड़ा बदलाव लाएगा पांच राज्यों का चुनाव-आंचलिक ख़बरें-क्रांति कुमार पाठक

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