विदिशा,
धर्माधिकारी पं. गिरधर गोविंद प्रसाद शास्त्री ने बताया कि सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर से एक रोचक कथा जुड़ी हुई है-
100 वर्ष पूर्व, धर्माधिकारी पं. गिरधर शास्त्री के दादा एवं वरिष्ठ धर्माधिकारी श्री पं. गोविंद प्रसाद शास्त्री के पिता पं. उमाशंकर शास्त्री ने इस मंदिर का निर्माण कर चमत्कारिक रूप से प्रकट श्री हनुमान जी की प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा यहाँ कराई थी|
पं. उमाशंकर शास्त्री एक आसन से 22 घंटे में अखंड रामायण का पाठ एवं एक आसन से हनुमान चालीसा के 108 पाठ करके भगवान श्री हनुमान जी की दिव्य आराधना किया करते थे, उन्हें हनुमान जी का इष्ट प्राप्त था |
100 वर्ष पूर्व मंगलवार की रात्रि में हनुमान जी ने पं. उमाशंकर शास्त्री को स्वप्न दिया, वेत्रवती नदी के श्री राम घाट के पास दो आम के वृक्ष लगे हुए हैं, उन वृक्षों के बीच, 11 हाथ के नीचे मेरी प्रतिमा है, उस प्रतिमा को वहाँ से निकालो और यहाँ प्रतिष्ठित कराओ, श्री उमाशंकर शास्त्री ने भेलसा (विदिशा का प्राचीन नाम) के विभिन्न लोगों को साथ लेकर, हाथों से खुदाई कराई 21 दिन तक निरंतर खुदाई के बाद, बाल रूप श्री हनुमान जी की विशाल प्रतिमा प्राप्त हुई, वहाँ से इस प्रतिमा को बैलगाड़ी में लाया गया, बैलगाड़ी में प्रतिमा को स्थापित करने के बाद जब बैलगाड़ी आगे नहीं बढ़ी तो “श्री राम जय राम जय जय राम” का कीर्तन प्रारंभ किया गया और नारियल चढ़ाएं गये, जैसे ही एक नारियल चढ़ाया जाता है, बैलगाड़ी एक कदम आगे बढ़ती थी, इस तरह कदम- कदम पर बैलों के कदम पर नारियल चढ़ा कर बैलगाड़ी को आगे बढ़ाया गया, जब विदिशा में नारियल समाप्त हो गये तब, घोड़े भेजकर रायसेन और आसपास के शहरों से नारियल मंगाए गए, और ऐसे नारियल चढ़ाकर इस बाल रूप भगवान श्री हनुमान जी की विशाल प्रतिमा को लाया गया | 100 वर्ष पूर्व हनुमान जयंती के दिन गुरु पुष्य नक्षत्र में पं. उमाशंकर शास्त्री द्वारा भगवान को यहां पर प्रतिष्ठित किया गया|
हनुमान जयंती के दिन धर्माधिकारी गिरधर शास्त्री के आचार्यत्व मे डॉ कपिल चतुर्वेदी, पवन सोनी, गिरिश् सुर्जन द्वारा भगवान का अभिषेक उपरांत चोला चढाया, हवन, पुष्पार्चन के साथ पूजन आरती कर ध्वजा चढा कर पुण्य लाभ प्राप्त किया जावेगा l
भूमि से प्रकट हुए हैं धर्माधिकारी चौक के सिध्देश्वर हनुमान जी-आंचलिक ख़बरें-भैया लाल धाकड़

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