राजस्व और वन विभाग की भूमिका संदिग्ध
चित्रकूट। क्षेत्र में अवैध खनन कितने बड़े स्तर पर हो रहा है इसकी एक बानगी वन विभाग व राजस्व विभाग के प्रतिबंधित क्षेत्र में दिखने को मिल जाएगी। जहां खनन माफिया ने वन विभाग और राजस्व के प्रतिबंधित क्षेत्र मे कई हजार घनमीटर उपखनिज निकालकर गहरा गड्ढा बना दिया। अवैध खनन के इस खेल में लाखों रुपये के वारे न्यारे भी किए गए। ताज्जूब इस बात का भी है कि नजदीकी क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन के इस खेल की वन विभाग के डीएफओ से लेकर फील्ड वन कर्मियों को कोई भनक तक नहीं लगी। वन विभाग से सटा क्षेत्र होने पर माफिया दोनों क्षेत्रों पर अवैध खनन करते हैं।
मानिकपुर वन परिक्षेत्र के सुवरगड़ा गांव और मंडपहा जंगल के आसपास कई स्थानों पर मिट्टी का अवैध खनन हो रहा है। खनन माफिया कई जगह पर गड्ढे खोदकर अवैध खनन करते हैं। गहरे गड्ढे बताते है कि कई दिन तक उपखनिज खोदा जाता रहा होगा। लेकिन न तो वन विभाग के वनाधिकारियों ने कोई कार्रवाई की और न संबंधित क्षेत्र के फील्ड कर्मियों ने। ऐसा नहीं कि यह क्षेत्र कहीं दूर हो। ऐसे में कई हजार घनमीटर का अवैध खनन होना विभागीय अनदेखी पर सवाल तो खड़े करता है। गड्ढा इतना गहरा है कि अधिकारी खोदे गए उपखनिज का अनुमान तक नहीं लगा पाए। शुक्रवार की दोपहर जब मीडियाकर्मियों के पहुंचने पर ट्राली मे मिट्टी लोड कर रहे मजदूर फावड़ा, तसला और ट्रैक्टर छोड़कर जंगलो के रास्ते रफूचक्कर हो गए। जानकारों ने बताया वन विभाग के मिलीभगत से यह अंजाम दिया जा रहा है। मानिकपुर वन परिक्षेत्र के कई जंगलो मे अवैध खनन के साथ जंगलों का कटान भी व्यापक पैमाने पर किया जा रहा है। राजस्व और वन विभाग की भूमिका संदिग्ध है।