नाल्सा योजना के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की विशेष टीम की बड़ी कार्रवाई
आंचलिक ख़बरें | डिजिटल डेस्क |
- नाल्सा योजना के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की विशेष टीम की बड़ी कार्रवाई
- एक मजदूर की हिम्मत से खुला मामला
- जिलाधिकारी को पत्र, तुरंत कार्रवाई के निर्देश
- छापेमारी में सामने आया अमानवीय सच
- वेतन नहीं, मारपीट और कैद जैसी स्थिति
- देर रात तक चली कार्रवाई, दो ठेकेदार गिरफ्तार
- गंभीर धाराओं में केस दर्ज
- मजदूरों को प्रमाणपत्र, सुरक्षित घर वापसी
- जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अपील
इक्कीसवीं सदी में भी बंधुआ मजदूरी जैसी अमानवीय प्रथा के सामने आने से ठाणे जिले में हड़कंप मच गया है। अंबरनाथ पश्चिम स्थित मे. शक्ति फूड इंडस्ट्रीज कंपनी में बंधुआ मजदूरी कराए जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
नाल्सा (नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी) योजना के अंतर्गत ठाणे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की विशेष टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए यहां से 10 परप्रांतीय बंधुआ मजदूरों को सुरक्षित मुक्त कराया है। यह जानकारी विशेष टीम की सदस्य अधिवक्ता तृप्ति पाटिल ने दी।
एक मजदूर की हिम्मत से खुला मामला
यह मामला 17 दिसंबर को उस समय उजागर हुआ, जब उत्तर प्रदेश निवासी बंधुआ मजदूर कमलेश फुन्नन बनवासी किसी तरह वहां से निकलकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करने में सफल हुआ।
उसकी आपबीती सुनने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल सेल के माध्यम से तत्काल आवेदन तैयार कर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव न्यायमूर्ति रविंद्र पाजणकर को प्रस्तुत किया गया।
जिलाधिकारी को पत्र, तुरंत कार्रवाई के निर्देश
न्यायमूर्ति पाजणकर ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत ठाणे जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल को पत्र भेजा।
नगरपालिका और महानगरपालिका चुनावों की व्यस्तता के बावजूद जिलाधिकारी ने मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए संबंधित सभी विभागों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
छापेमारी में सामने आया अमानवीय सच
जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में राजस्व, पुलिस और श्रम विभाग के समन्वय से त्वरित छापेमारी की गई।
जांच में सामने आया कि उत्तर प्रदेश के भदोही, जौनपुर आदि जिलों से आए 10 मजदूरों को ठेकेदार निक्की उर्फ कृष्णा कुमार अग्रहरि और नितिन तिवारी ने 18 से 20 हजार रुपये वेतन, रहने और भोजन की सुविधा का लालच देकर काम पर लगाया था।
वेतन नहीं, मारपीट और कैद जैसी स्थिति
हकीकत में मजदूरों से अत्यधिक काम कराया गया, पर्याप्त भोजन नहीं दिया गया और वेतन भी नहीं दिया गया।
आरोप है कि मजदूरों के साथ मारपीट की जाती थी, उन्हें एक छोटे से कमरे में बंद रखा जाता था, रात में बाहर से ताला लगाया जाता था और उनके मोबाइल फोन जब्त कर परिवार से संपर्क पूरी तरह तोड़ दिया गया था।
देर रात तक चली कार्रवाई, दो ठेकेदार गिरफ्तार
जिलाधिकारी के निर्देश पर निवासी उपजिलाधिकारी डॉ. संदीप माने के मार्गदर्शन में अंबरनाथ के तहसीलदार अमित पुरी, श्रम विभाग और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त टीम ने देर रात तक कार्रवाई की।
अंततः अंबरनाथ पुलिस स्टेशन में सुबह करीब पांच बजे मामला दर्ज किया गया।
इस कार्रवाई में 10 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया गया और दो ठेकेदारों को गिरफ्तार किया गया है।
गंभीर धाराओं में केस दर्ज
आरोपियों के खिलाफ बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मानव तस्करी से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
मजदूरों को प्रमाणपत्र, सुरक्षित घर वापसी
मुक्त कराए गए सभी मजदूरों को बंधुआ मजदूरी प्रमाणपत्र प्रदान कर सुरक्षित रूप से उनके मूल गांव उत्तर प्रदेश भेज दिया गया है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अपील
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी बंधुआ मजदूरी या असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का शोषण दिखाई दे, तो चुप न रहें।
ऐसी स्थिति में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के स्पेशल सेल फॉर अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर वर्कर्स से तुरंत संपर्क करें।

