गोरखपुर में छुट्टा पशुओं से कुसहरा गांव के किसान बेहाल, सैकड़ों एकड़ फसल तबाह

Anchal Sharma
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जंगल कौड़िया क्षेत्र में रबी की फसलें बर्बादी के कगार पर, किसान दिन-रात खेतों की रखवाली को मजबूर

डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |

जंगल कौड़िया क्षेत्र के कुसहरा गांव सहित आसपास के लगभग दो दर्जन गांवों के किसान इन दिनों छुट्टा पशुओं के आतंक से बुरी तरह परेशान हैं। सैकड़ों की संख्या में घूम रहे पशुओं के झुंड खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को रौंद रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। गेहूं, जौ, सरसों, आलू, मटर, दलहन और तिलहन जैसी रबी की प्रमुख फसलें बर्बाद हो रही हैं।

राप्ती-रोहिन के बीच बसे गांव सबसे ज्यादा प्रभावित

राप्ती और रोहिन नदियों के बीच तलहटी क्षेत्र में बसे इन गांवों में छुट्टा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। किसानों के अनुसार बड़े-बड़े झुंड कुछ ही घंटों में सैकड़ों एकड़ में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा देते हैं। कुसहरा सहित आसपास के गांवों में अब तक भारी मात्रा में फसल नष्ट हो चुकी है, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा है।

कर्ज लेकर बोई फसल, बर्बादी से बढ़ी चिंता

स्थानीय किसान राम सिंह, विजय सिंह, शंभू गौड़, राकेश गुप्ता, संदलू कनौजिया और रामवृक्ष सदई निषाद का कहना है कि वे कर्ज लेकर रबी की फसल की बुवाई करते हैं। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर भारी खर्च के बावजूद जब फसल तैयार होने से पहले ही नष्ट हो जाती है, तो उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाती है।

रात-रात भर जागकर करनी पड़ रही रखवाली

किसानों का कहना है कि रात के समय समस्या और गंभीर हो जाती है। ठंड के बावजूद वे खेतों में अलाव जलाकर, टॉर्च और डंडे लेकर फसलों की निगरानी करते हैं। कई बार पूरी रात जागने के बाद भी पशुओं को रोक पाना संभव नहीं हो पाता। कुछ किसानों को अपने बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को भी रखवाली में लगाना पड़ रहा है।

सामूहिक प्रयास भी नहीं दे पा रहे राहत

ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र का दायरा बड़ा होने के कारण व्यक्तिगत या सामूहिक स्तर पर भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। एक खेत से भगाए गए पशु तुरंत दूसरे खेत में घुस जाते हैं। किसानों में यह डर बढ़ रहा है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो खेती करना घाटे का सौदा बन जाएगा।

प्रशासन से स्थायी समाधान और मुआवजे की मांग

किसानों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से छुट्टा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। उन्होंने गौशालाओं की संख्या बढ़ाने, मौजूदा गौशालाओं की व्यवस्था सुधारने और नियमित रूप से पशुओं को पकड़कर वहां भेजने की कार्रवाई की मांग की है। साथ ही फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा दिए जाने की भी अपील की गई है।

किसानों की आजीविका पर मंडरा रहा संकट

कुल मिलाकर, जंगल कौड़िया क्षेत्र के कुसहरा गांव और आसपास के इलाकों में छुट्टा पशुओं का बढ़ता उत्पात किसानों के लिए गंभीर संकट बन चुका है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसानों की आजीविका पर गहरा असर पड़ेगा और खेती से उनका भरोसा डगमगा सकता है।

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