नवाबगंज । दो दशक पूर्व शासन ने नगर में राजकीय होमियोपैथिक चिकित्सालय स्वीकृत किया था लेकिन अपनी स्थापना के बाद से ही ये अस्पताल स्थान के अभाव से जूझ रहा है। सबसे पहले नगर के ही एक निजी होमियो चिकित्सक के प्रतिष्ठान पर किराए के भवन में चलने के बाद आज इस चिकित्सालय को एक ग्राम के पंचायतघर में भेज दिया गया है । पंचायत भवन में पहुंचने के बाद हाल ये हो गया है कि अब ये अस्पताल जनसामान्य की पहुंच व पहचान से दूर हो गया है ।
पहले किराए के भवन में और अब पंचायतघर में आखिर ये क्या यही हाल है स्वास्थ्य विभाग का ? एक ओर तो होमियोपैथी के प्रति जनसामान्य का बढ़ता रुझान और उस पर मात्र स्थल उपलब्ध न होने के कारण क्षेत्र के इस इकलौते सरकारी चिकिस्सालय की ये दुर्गति! ये बात किसी के भी गले उतरने वाली नहीं है लेकिन ऐसा है नगर में कोई स्थल उपलब्ध न होने के कारण इसे पास के ग्राम हरदुआ के पंचायत घर में भेज दिया गया है जहां मात्र पांच सात ग्रामों के रोगी ही पहुंच पाते हैं । काश स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसकी सुध ली होती तो शायद ये समूचे क्षेत्र को लाभ पहुंचा सकता था। उस पर हाल ये है कि मात्र एक चिकित्सक कविता उपाध्याय व चौकीदार कुलदीप कुमार की ही यहां तैनाती है वह भी आउट सोर्सिंग के तहत और चौकीदार / चपरासी को14 माह से वेतन तक नहीं मिला है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि इस अस्पताल को नगर में ही कहीं स्थापित किया जाए तब ही समूचे इलाके को इसका लाभ मिल सकता है। चिकित्सालय की प्रभारी सुश्री डा0 कविता उपाध्याय ने बताया कि रोजाना पचास से साठ रोगी ही यहां पहुंचते हैं हां यदि ये तहसील मुख्यालय पर हो तो रोगियों की संख्या में खासी बढात्तरी हो सकती है आखिर कब तक अस्पताल को नगर में जगह मिलेगी मरीजों की संख्या तादाद से ज्यादा बढ़ती जा रही है डॉक्टर कविता पांडे ने प्रयास बहुत किया लेकिन नगर में जगह नहीं मिलने के कारण हल्दुआ किफायतुल्लाह में शिफ्ट करना पड़ा देखने वाली बात यह है नगर पालिका चेयरमैन होम्योपैथिक की अस्पताल को जगा देती है या नहीं यह अस्पताल नवाबगंज नगर में होना चाहिए लोगों ने भी इसका विरोध किया उससे ज्यादा डॉक्टर कविता पांडे ने उच्च अधिकारियों को ज्ञापन भी दिया था पर इसका कोई निर्णय नहीं निकला उसके बाद मीडिया में अपना दर्द सुनाया मीडिया ने उनको आश्वासन दिया कि हम आपको नवाबगंज नगर में जगह दिलाएंगे और अधिकारियों से बात करेंगे हम आपकी बात केवल मीडिया के माध्यम से अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं उससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं फिलहाल हम आपको अस्पताल का अधिकार दिलाकर रहेंगे चाहे हमें अधिकारियों से बात करना पड़े या उच्च अधिकारियों से बात करना पड़े वह हम करेंगे आंचलिक खबर के संवाददाता, से हुई वार्ता, डॉक्टर कविता पांडे ने सुनाया अपना दर्द हमारे चैनल पर.