33वीं वाहिनी पीएसी झांसी में पूर्वी जोन की 28वीं अन्तर वाहिनी कुश्ती कलस्टर प्रतियोगिता का भव्य उद्घाटन | Jhansi UP

News Desk
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33वीं वाहिनी पीएसी झांसी में पूर्वी जोन की 28वीं अन्तर वाहिनी कुश्ती कलस्टर प्रतियोगिता का भव्य उद्घाटन
कबूतरों और गुब्बारों के साथ ऐतिहासिक शुरुआत
10 टीमों के 250 खिलाड़ी भिड़े, झांसी बना महाकुंभ का साक्षी!
र्म्स रेसलिंग और बॉडी बिल्डिंग में दिखी दमखम की जंग, दर्शकों ने की जमकर सराहना!

झांसी की ऐतिहासिक भूमि एक बार फिर शौर्य, पराक्रम और खेल की भावना से गूंज उठी जब 33वीं वाहिनी पीएसी झांसी के भव्य मैदान में पीएसी पूर्वी जोन की 28वीं अन्तर वाहिनी कुश्ती कलस्टर प्रतियोगिता का शुभारंभ हुआ। इस प्रतिष्ठित खेल महाकुंभ का उद्घाटन आयोजन सचिव एवं सेनानायक श्री अजीत कुमार सिन्हा (IPS) द्वारा किया गया।

आकाश में उड़ते कबूतरों और रंग-बिरंगे गुब्बारों के साथ जब इस महाकुंभ की औपचारिक शुरुआत हुई, तो पूरे मैदान में एक जोश और रोमांच की लहर दौड़ गई। हजारों की संख्या में मौजूद दर्शकों और खिलाड़ियों ने अपने-अपने पसंदीदा प्रतियोगियों के लिए उत्साह बढ़ाया।

प्रतियोगिता में 10 टीमों की भागीदारी, 250 खिलाड़ी मुकाबले में उतरे

यह गौरवपूर्ण प्रतियोगिता पूरे पीएसी पूर्वी जोन की 10 प्रमुख वाहिनियों के बीच खेली जा रही है, जिनमें शामिल हैं:

1. 04वीं वाहिनी, प्रयागराज
2. 12वीं वाहिनी, फतेहपुर
3. 20वीं वाहिनी, आजमगढ़
4. 33वीं वाहिनी, झांसी
5. 34वीं वाहिनी, वाराणसी
6. 36वीं वाहिनी, वाराणसी
7. 37वीं वाहिनी, कानपुर नगर
8. 39वीं वाहिनी, मिर्जापुर
9. 42वीं वाहिनी, नैनी प्रयागराज
10. 48वीं वाहिनी, सोनभद्र

इन दस वाहिनियों से कुल 250 खिलाड़ी कुश्ती, बॉक्सिंग, आर्म्स रेसलिंग और बॉडी बिल्डिंग जैसे शक्ति और सहनशक्ति के खेलों में अपना दमखम दिखाने के लिए उतरे हैं।

प्रतिस्पर्धा का पहला दिन – जब शौर्य और संघर्ष की गूंज सुनाई दी

प्रतियोगिता के पहले दिन मैदान में केवल खेल नहीं, बल्कि पराक्रम और रणनीति की जंग भी देखी गई। हर खिलाड़ी ने अपनी वाहिनी की शान और सम्मान के लिए जोर आजमाइश की, और मुकाबलों में रोमांच की कोई कमी नहीं रही।

कुश्ती फ्रीस्टाइल – जब दांव-पेंच का कमाल दिखा

कुश्ती प्रतियोगिता के 65 कि.ग्रा. भार वर्ग में 20वीं वाहिनी, आजमगढ़ के आरक्षी राजकुमार ने अपने प्रतिद्वंदी को शानदार पटखनी देते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। उनके आक्रामक दांव-पेंच और तेज़ी से किए गए मूव्स ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

वहीं, 70 कि.ग्रा. भार वर्ग में 04वीं वाहिनी, प्रयागराज के आरक्षी शिवम सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विजयी ताज अपने नाम किया।

बॉक्सिंग – जब मुक्कों की गूंज से मैदान कांप उठा

बॉक्सिंग प्रतियोगिता में 80 कि.ग्रा. भार वर्ग के मुकाबले में 33वीं वाहिनी, झांसी के आरक्षी कुलदीप यादव और 39वीं वाहिनी, मिर्जापुर के आरक्षी प्रियांशू के बीच मुकाबला इतना जबरदस्त और बराबरी का था कि रेफरी को इसे ड्रा घोषित करना पड़ा।

दोनों खिलाड़ियों ने पूरी ताकत झोंक दी, और उनके सटीक मुक्कों और शानदार डिफेंस ने दर्शकों को रोमांच से भर दिया।

आर्म्स रेसलिंग और बॉडी बिल्डिंग – ताकत और सहनशक्ति की परीक्षा

प्रतियोगिता का आकर्षण केवल कुश्ती और बॉक्सिंग तक ही सीमित नहीं था। आर्म्स रेसलिंग और बॉडी बिल्डिंग में भी खिलाड़ियों ने अपनी अद्भुत ताकत और सहनशक्ति का परिचय दिया।

प्रतियोगिता के दौरान जब खिलाड़ियों ने अपनी बाहों की ताकत को आजमाया, तो पूरा मैदान उनके समर्थन में गूंज उठा। बॉडी बिल्डिंग के दौरान जब प्रतिभागियों ने अपनी कड़ी मेहनत का नतीजा दिखाया, तो तालियों की गड़गड़ाहट से माहौल गूंज उठा।

विशेष अतिथियों की उपस्थिति ने बढ़ाया खिलाड़ियों का हौसला

इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए, जिनकी उपस्थिति ने खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को और मजबूत कर दिया।

इस समारोह में उपस्थित थे:

– पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्री गोपीनाथ सोनी
– सहायक सेनानायक श्री इश्तियाक अहमद
– शिविरपाल श्री प्रणव कुमार सिंह
– सूबेदार सैन्य सहायक श्री धर्मराज सिंह भदौरिया
– सहायक शिविरपाल श्री गजेन्द्र सिंह
– पीसी हरिनाम सिंह

इन सभी अधिकारियों ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया और उन्हें कड़ी मेहनत और अनुशासन का महत्व समझाया।

समापन समारोह – 11 मार्च को होगा महाअंतिम मुकाबला

इस अद्भुत प्रतियोगिता का समापन समारोह 11 मार्च 2025 को होगा, जहां विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का चयन किया जाएगा।

इस समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। यह देखना रोमांचक होगा कि कौन सी वाहिनी इस वर्ष की चैम्पियन बनती है और कौन से खिलाड़ी सर्वोत्तम साबित होते हैं।

यह प्रतियोगिता सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सम्मान और गरिमा की लड़ाई है। यह एक ऐसा मंच है, जहां पीएसी के वीर योद्धा न केवल अपनी ताकत दिखाते हैं, बल्कि अनुशासन, मेहनत और समर्पण का परिचय भी देते हैं।

झांसी का यह मैदान साक्षी रहेगा उन वीर खिलाड़ियों का, जिन्होंने अपनी वाहिनी का नाम रोशन करने के लिए पसीना बहाया और संघर्ष किया।

अब सबकी निगाहें 11 मार्च 2025 को होने वाले समापन समारोह पर टिकी हैं, जहां विजेताओं का सम्मान होगा और यह तय होगा कि इस प्रतियोगिता का असली ‘शेर’ कौन है।

तो तैयार रहिए! क्योंकि असली लड़ाई अभी बाकी है!

 

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