अल्ट्राटेक के ही अधिकारी व कर्मचारी शासन की जमीनों को खरीद व बेच कर लाखो करोड़ो की लगा रहे अल्ट्राटेक को चुना-आंचलिक ख़बरें-राजेंद्र राठौर

News Desk
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मैहर।शासन की जमीनों को खुर्द बुर्द करने का लगता है मानो फैशन हो गया है। रुपया वाले लोग इन दिनों न तो कानून से डरते है न तो कानून को कुछ समझते है।जमीनो का खेल ऐसे खेलते है मानो फैशन शो में कपड़े बदलते हो जब चाहो किसी की जमीन किसी के नाम चढ़ा दो या बेच दो इसका शायद एक कारण यह है कि ज्यादातर कार्यवाहियों से बच जाते है,इस लिए लोगो के फर्जी कामों को जोर शोर से अंजाम देते है। इसी तरह एक फर्जी जमीन भदनपुर द.प. की शासकीय जमीन का मामला आया है अब देखना है कि इस मामले में कितनी व किस तरह की कार्यवाही होती है? 2016/ 17 अराजी नम्बर 1067/4 रकवा 0.4700 हे. मौजा भदनपुर द.प. में मध्यप्रदेश शासन भूमि स्वामी दर्ज उसके बाद 2017/ 18 में चंद्रकली पति रामसेवक जैसवाल लटगांव के नाम भूमि स्वामी के नाम अराजी नम्बर 1067/4 रकवा 0.4700 हे. मौजा भदनपुर द.प. में दर्ज कर दिया गया है। इसी जमीन को 17,12,2021 को उप पंजीयन सतना में अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड द्वारा नाम पर रजिस्ट्री की गई जिसमें बेचने वाली चंद्रकली पति रामसेवक जैसवाल की रजिस्ट्री में पता वार्ड नम्बर 7 सतखुड़ी विद्यालय के पास बाणसागर जिला शहडोल मध्यप्रदेश, सतना मध्यप्रदेश भारत लिखा है।जिसका अराजी नम्बर 1067/4 रकवा 0.470 हे. मौजा भदनपुर द.प. को करीब 18 लाख 4 हजार रुपये में खरीद व इसके हिसाब से अल्ट्राटेक ने करीब 1लाख 17 हजार के करीब स्टाम्प ड्यूटी लगी जो कि अल्ट्राटेक सीमेंट ने रुपया खर्च किया अब यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जब रजिस्ट्री की पहले अल्ट्राटेक सीमेंट के जमीन की खरीद फरोख्त करने वाले अधिकारी बिना जांच किये सब रजिस्ट्री कर दिए या वर्षो से इस शासकीय जमीनों को खुर्द बुर्द करने और अल्ट्राटेक सीमेंट के रुपयो की बंटाधार करने की कंपनी के ही अधिकारियों की मिली भगत से ये सारा खेल किया जाता रहा है। जबकि बतौर अल्ट्राटेक कंपनी के तरफ से कई जिम्मेदार अधिकारी व दलाल नियुक्त है ।और रजिस्ट्री में दो गवाह भी लिखे गए है जो एक अनूप सिंह पिता कुशलेन्द्र सिंह निवासी वार्ड नम्बर 36 कामता टोला तहसील रघुराजनगर जिला सतना मध्यप्रदेश ,2 नम्बर गवाह सोने लाल जैसवाल पिता रामसेवक जैसवाल निवासी लटागाव तहसील मैहर जिला सतना मध्यप्रदेश उलेख किया गया है।
जब रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए फाइल मैहर तहसीलदार मानवेन्द्र सिंह के पास गई तो रजिस्ट्री में कई कमियां और खसरे में दर्ज नाम पर विपरीत दिखने लगा तो जब पुराना खसरा देखने पर शासकीय होने के प्रमाण मिले जिसके बाद नामांतरण का मामला फस गया और मैहर तहसीलदार द्वारा 25 जनवरी 2022 को नामांतरण आवेदन खारिज करते हुए जांच की गई और सबसे पहले हल्का पटवारी अशोक सिंह पर कार्यवाही की गाज गिरी। सूत्रों की माने तो अल्ट्राटेक सीमेंट की जमीन खरीदी विभाग के अनूप सिंह एवम अनिल तिवारी है। ये इतने बड़े खिलाड़ी है कि पैसों के दम पर पहले शासकीय जमीनों को किसी व्यक्ति के नाम करवाते है जो इनकी इशारों पर चले और उसके बाद राजस्व की मिली भगत से सारा खेल चलता है।सूत्र यह भी दावा करते है कि अगर इसी तरह ये तीनो कंपनी में जमे रहे तो जमीनों के नाम पर अल्ट्राटेक को खोखला कर बर्बाद कर देंगे? वही ऐसा प्रतीत होता है कि मैहर की शासकीय जमीनो को खुर्द बुर्द करने के लिए सतना के रजिस्ट्री विभाग ने कसम खा रखी है क्योंकि ज्यादातर मामले जमीनो के फर्जी रजिस्ट्रियां सतना में होती है या यूं कहें कि मैहर के भू माफियो के लिए आशिर्बाद देने का काम करती सतना के रजिस्ट्री विभाग? आखिर जब मैहर में रजिस्टार ऑफिस है तो सतना में क्यो की जाती है रजिस्ट्रियां?
इस संबंध में जब मैहर तहसीलदार मानवेन्द्र सिंह से बात की गई तो ये बताया गया कि रजिस्ट्री सतना में हुई थी लेकिन जब नामान्तर के लिए हमारे पास आई तो खसरा चेक करने पर जानकारी हुई कि ये जमीन पहले मध्यप्रदेश शासन की थी फिर जांच कराई गई जिसके बाद नामांकन आवेदन खारिज करते हुए हल्का पटवारी अशोक सिंह पर कार्यवाही करते हुए प्रस्ताव माननीय कलेक्टर महोदय को भेज दिया गया है। जिसमे जल्द ही भूमि को मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज हो जाएगी और अन्य जो इस मामले में दोषी है उनके ऊपर कानूनी कार्यवाही की जाएगी?

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