मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज में जनपद पंचायत सीईओ शोभित त्रिपाठी ने कागज पर कम उम्र दिखाकर 70 साल के बुजुर्ग की शादी होना बता दिया जिनके यहां बेटी नहीं है उनकी भी बेटी का विवाह होना बताकर विवाह योजना सहायता में शासन से मिलने वाली 51 हजार रुपए की राशि हड़प ली इस तरह से उन्हें कोरोनावायरस की लहर में लॉकडाउन के दौरान 3500 जोड़ों का फर्जी विवाह करा दिये यहां सारे तथ्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की जांच में सामने आए हैं ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकता में बताया गया कि जांच के दौरान कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई है इसमें जनपद सीओ त्रिपाठी ने कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से दस्तावेजों में हेराफेरी की है कुछ मामले ऐसे मिले हैं जिनमें एक ही व्यक्ति की दो से तीन बार शादी होना बताया गया है इसके अलावा जिनकी बरसों पहले शादी हो गई थी उनके नाम भी इस योजना में पात्र हितग्राही के रूप में दर्शा दिए हैं ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला कि जिनके नाम पर विवाह सहायता योजना की राशि मंजूर करना बताया हमें पता ही नहीं कि उनके नाम से कोई राशि जारी हुई है इसके साथ ही जनपद कर्मचारियों के रिश्तेदारों के नाम पर भी फर्जी विवाह दिखाकर राशि आहरण के सबूत मिले हैं ईओडब्ल्यू के जांच अधिकारियों के मुताबिक इस घोटाले में कुछ पंचायत सचिव भी घोटाले में शामिल लोगों ने फर्जी दस्तावेजों से बैंक में फर्जी नामों से खाता खुलवा और बाबा योजना में सहायता राशि इन खातों में डाल कर निकाल ली गई अधिकारियों का कहना है कि इस घोटाले में लिप्त कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी
कोरोना महामारी के चलते वर्ष 2020 में पूरे देश में 5 बार 98 दिनों का लॉकडाउन रहा जिसमें सारी गतिविधियां बनती लेकिन संयोग जनपद में 1 अप्रैल से 30 जून की अवधि में भी बेटियों के विवाह होना बता दिया इस अवधि में जनपद सीओ त्रिपाठी ने 35 विवाह कागजों पर करा दिए मालूम हो देश में कोरोना के बाद पहला लॉकडाउन लागू 25 मार्च 2020 से 14 अप्रैल तक 21 दिन का इसके बाद दूसरा लॉक डाउन 15 अप्रैल से 3 मई तक 19 दिन तक तीसरा 4 मई से 17 मई तक 14 दिन का चौथा 18 मई से 31 मई तक 14 दिन का और अंतिम पांच वाला 1 जून से 30 जून 2020 से 30 जून तक रहा था