मनीषा कोइराला से युवराज सिंह तक… ये 5 योद्धा जिन्होंने कैंसर को हराकर लाखों लोगों को दी उम्मीद

Anchal Sharma
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cancer survival

कैंसर नहीं बना अंत, बनी नई शुरुआत

डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |

जिस बीमारी का नाम सुनते ही अक्सर लोग टूट जाते हैं, उसी कैंसर को कुछ लोगों ने अपनी हिम्मत, सही इलाज और सकारात्मक सोच से मात दी। ये लोग सिर्फ अपनी जंग नहीं जीते, बल्कि आज लाखों लोगों के लिए उम्मीद, साहस और जागरूकता की पहचान बन चुके हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही भारत के पाँच कैंसर योद्धाओं की प्रेरणादायक कहानियाँ।

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मनीषा कोइराला: कैंसर ने सिखाया ज़िंदगी का असली मतलब

बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला को साल 2012 में अचानक तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ जांच में ओवेरियन कैंसर की पुष्टि हुई। इलाज के लिए वे न्यूयॉर्क गईं, सर्जरी करवाई और लंबे समय तक मानसिक व शारीरिक संघर्ष से गुज़रीं। आज वे पूरी तरह कैंसर मुक्त हैं। उनकी किताब Healed इस बात का प्रमाण है कि कैंसर अंत नहीं, बल्कि जीवन को नए नज़रिए से देखने का मौका भी हो सकता है।

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ताहिरा कश्यप: डर को तोड़कर सच को अपनाया

लेखिका और थिएटर डायरेक्टर ताहिरा कश्यप, जो अभिनेता आयुष्मान खुराना की पत्नी हैं, को स्टेज-0 ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। उन्होंने मास्टेक्टॉमी सर्जरी करवाई और अपनी बीमारी को छुपाने के बजाय खुलकर इसके बारे में बात की। उनकी किताब The 12 Commandments of Being a Woman महिलाओं को यह सिखाती है कि डर से नहीं, जानकारी और साहस से लड़ाई जीती जाती है।

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लिसा रे: दुर्लभ कैंसर के सामने असाधारण हौसला

मॉडल और अभिनेत्री लिसा रे को साल 2009 में मल्टीपल मायलोमा, एक दुर्लभ रक्त कैंसर, हुआ। उन्होंने The Yellow Diaries ब्लॉग के ज़रिए अपनी जर्नी साझा की और अपनी किताब Close to the Bone में बताया कि बीमारी ने उन्हें भीतर से कैसे बदल दिया। लिसा आज कैंसर के प्रति जागरूकता की मज़बूत आवाज़ बन चुकी हैं।

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सोनाली बेंद्रे: उम्मीद और सकारात्मकता की मिसाल

अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे बहल को हाई-ग्रेड कैंसर हुआ, जिसके इलाज के लिए वे न्यूयॉर्क गईं। इलाज के दौरान सोशल मीडिया पर उनके सकारात्मक संदेश लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बने। उनकी किताब The Modern Gurukul यह बताती है कि मुश्किल समय में परिवार और जड़ों से जुड़ाव कितना ज़रूरी होता है।

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युवराज सिंह: मैदान की जीत से ज़िंदगी की जीत तक

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी युवराज सिंह को 2011 वर्ल्ड कप के बाद मीडियास्टाइनल सेमिनोमा लंग कैंसर हुआ। उन्होंने अमेरिका में इलाज कराया, अकेले इस बीमारी से जंग लड़ी और फिर क्रिकेट के मैदान पर ज़ोरदार वापसी की। उनकी किताब The Test of My Life: From Cricket to Cancer and Back संघर्ष, आत्मविश्वास और वापसी की कहानी है।

क्या सिखाती हैं ये कहानियाँ?

इन पाँचों ज़िंदगियों से एक बात साफ़ है—कैंसर किसी को देखकर नहीं आता, लेकिन समय पर जांच, सही इलाज और मज़बूत हौसले से इसे हराया जा सकता है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि शुरुआती पहचान और जागरूकता कैंसर से लड़ाई की सबसे बड़ी ताकत है।

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