राजेंद्र राठौर
सरकार ने जीएसटी में 6 साल बाद राहत दी, व्यापारी योजना का लाभ लें – कैट जिलाध्यक्ष मुकेश जैन
(नाकोड़ा ) झाबुआ- कनफेडरेशन आफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के जिलाध्यक्ष मुकेश जैन ने बताया कि जीएसटी कानून 1 जुलाई 17 से लागू किया था। आज लगभग 6 साल हो चुके हैं केंद्र सरकार ने पहली बार अमेनेस्टी स्कीम में राहत योजना को घोषित किया।
कैट प्रदेश उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कर सलाहकार माहेश्वरी ने बताया कि कर प्रणाली में जो भी राहत व्यापारियों को दी है उसकी अंतिम तारीख 30 जून 2023 है, जिसमें यह बताया कि जिन व्यापारियों ने अपनी जीएसटी रिटर्न जमा नहीं की जिसके कारण पंजीयन निरस्त हो गए अगर वह 30 जून 2023 के पहले अपने समस्त रिटर्न मय निर्धारित लेट फीस, विलंब शुल्क के जमा कर देते हैं तो उनको लगने वाली लाखों रुपए के विलंब शुल्क के भार में कमी मिल जायेगी। निर्धारित शुल्क जमा कर रिटर्न नियमित करने का मौका मिल रहा है। जिसका फायदा व्यापारियों को लेना चाहिए और अपनी रिटर्न जमा कर पंजीयन बहाल करवा लेना चाहिए। इस स्कीम को चूकना नहीं चाहिए वरना सरकार दोबारा मौका नहीं देगी।
माहेश्वरी ने यह भी बताया कि जीएसटी लागू होने से वर्ष भर के आखरी दिन तक जिन व्यापारियों के रिटर्न नहीं जमा करने के कारण पंजीयन निरस्त हुए हैं फिर से उन्हें रिटर्न जमा करने पर पंजीयन बाहर करने का मौका मिल रहा है इतना ही नहीं यदि पंजीयन निरस्त के विरुद्ध व्यवसाय द्वारा अपनी अपील पेश की गई है और वह भी अपील अधिकारी द्वारा निरस्त हो चुकी है तो भी व्यापारी इस स्कीम में शामिल होकर पंजीयन बहाल कर करवा सकते हैं। यह व्यापारी समस्त रिटर्न मैं ब्याज, विलंब शुल्क के साथ जमा कर अपलोड कर 30 जून 23 तक अंतिम तारीख के पूर्व इन्हें आवेदन देना होगा। सरकार ने जीएसटी में पहली बार कई वर्षो की कैट की मांग के बाद पहली बार कुछ बाते मान कर व्यापारियों को राहत देकर एक अच्छी सोच का परिचय दिया है।
स्कीम को लेकर कई विशेषज्ञ एवं कर सलाहकार भी अपने व्यवसाय को चौकन्ना करने में लगे हैं। वह इस स्कीम के फायदे लेने की सलाह दे रहे हैं ताकि तारीख निकलने के बाद पछताना ना पड़े। जिन व्यवसायियों को वार्षिक टर्नओवर 10 करोड़ से अधिक है लेकिन वार्षिक रिटर्न जमा करना भूल गए थे उन्हें नियमानुसार ₹200 प्रतिदिन विलंब शुल्क देना पड़ता था लेकिन माहेश्वरी ने बताया कि ऐसे व्यवसाय को विलंब शुल्क लगभग दो से ढाई लाख रुपए चुकाना पड़ रहा है किंतु शासन की स्कीम अब इस योजना में राहत देते हुए वे सिर्फ बीस हजार रूपए के विलंब शुल्क के साथ रिटर्न दाखिल कर सकते है एवम जिन व्यापारियों का रिटर्न 5 करोड़ से कम है वह व्यवसाई 30 जून 23 तक वार्षिक रिटर्न प्रस्तुत कर देते हैं तो ऐसी स्थिति में उन्हें ₹200 प्रतिदिन के बजाय ₹50 प्रतिदिन विलंब शुल्क ही जमा करना होगा। जो किसी भी स्थिति में 20,000 से ज्यादा विलंब शुल्क नहीं लगेगा।
5 करोड़ से 20 करोड़ तक के व्यापारी भी ₹100 प्रतिदिन विलंब शुल्क या अधिकतम ₹20000 की सीमा के साथ योजना में शामिल हो सकते हैं। कंपोजिशन डीलर को तो वार्षिक रिटर्न के विलंब शुल्क में और बड़ी राहत दी गई है छोटे-छोटे व्यापारी अधिकतर कंपोजिशन स्कीम में रहते हैं शासन ने उन्हें विलंब शुल्क की वार्षिक रिटर्न जो ₹10000 किया जा रहा था। अब सिर्फ ₹1000 विलंब शुल्क जमा करके अपनी रिटर्न प्रस्तुत कर सकते हैं। इस प्रकार से केंद्रीय शासन द्वारा कई दिनों से केट व अन्य व्यवसाय द्वारा उठाए जा रहे हैं अपनी तकलीफ के बारे में शासन का ध्यान आकर्षित कराया गया। जिन्हें केंद्र शासन ने मानवीय कर्तव्य मानकर पहली बार विषयों के पक्ष में कदम उठाया है।