ख़ालिदा जिया: सत्ता, संघर्ष, जेल और बीमारी के बीच एक पूरा राजनीतिक युग

Anchal Sharma
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khalida ziya

बांग्लादेश की सबसे प्रभावशाली लेकिन विवादित महिला नेता का जीवन और विरासत

डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |

बांग्लादेश की राजनीति में ख़ालिदा जिया का नाम हमेशा प्रभाव, टकराव और बदलाव के प्रतीक के रूप में लिया जाएगा। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष, देश की पहली महिला प्रधानमंत्री और दो बार सत्ता संभालने वाली ख़ालिदा जिया का राजनीतिक सफ़र सत्ता, संघर्ष, जेल और बीमारी के कठिन दौर से होकर गुज़रा।

पहली महिला प्रधानमंत्री, दो बार सत्ता में

ख़ालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। उन्होंने दो कार्यकालों में देश का नेतृत्व किया—
1991 से 1996 और फिर 2001 से 2006 तक।
वे बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और स्वतंत्रता संग्राम के नायक ज़ियाउर रहमान की पत्नी थीं, जिनकी हत्या के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा।

जन्म और राजनीति में प्रवेश

ख़ालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को हुआ था। पति ज़ियाउर रहमान की हत्या के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। निजी दुख और राजनीतिक दबाव के बीच उन्होंने खुद को BNP के चेहरे के रूप में स्थापित किया और धीरे-धीरे एक मज़बूत जननेता के रूप में उभरीं।

BNP पर मजबूत पकड़ और नेतृत्व शैली

BNP से जुड़ने के बाद ख़ालिदा जिया ने पार्टी पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत रखी। कहा जाता है कि उन्होंने सेना या किसी अन्य ताक़त के दबाव में झुकने से इनकार किया। उनके समर्थक उन्हें एक दृढ़ और साहसी नेता मानते हैं, जिन्होंने अपने शासनकाल में अपेक्षाकृत स्थिर सरकार चलाई।

शेख हसीना से टकराव और राजनीतिक अस्थिरता

हालांकि उनका नेतृत्व हमेशा विवादों से घिरा रहा। शेख हसीना के साथ उनकी तीखी राजनीतिक दुश्मनी ने बांग्लादेश को लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता में रखा। समझौते की राजनीति कम और सत्ता बनाम विपक्ष की लड़ाई ज़्यादा दिखाई दी, जिसने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बार-बार प्रभावित किया।

भ्रष्टाचार के आरोप और जेल का दौर

ख़ालिदा जिया और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। वर्ष 2018 में जेल जाना उनकी छवि पर एक बड़ा धक्का साबित हुआ। BNP ने इन मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि आलोचकों ने इसे उनके शासन की सबसे बड़ी असफलता करार दिया।

दोहरी छवि: समर्थकों और आलोचकों की नजर में

ख़ालिदा जिया की राजनीति की सबसे बड़ी विशेषता उनकी दोहरी छवि रही। एक ओर जनता का एक बड़ा वर्ग उन्हें मज़बूत जननेता और बेहतर शासक मानता है, तो दूसरी ओर आलोचक उन्हें टकराव और भ्रष्टाचार की राजनीति करने वाली नेता बताते हैं।
इसी कारण इतिहास उन्हें न पूरी तरह सफल और न पूरी तरह असफल, बल्कि एक प्रभावशाली लेकिन विवादित प्रधानमंत्री के रूप में याद करता है।

बीमारी और जीवन का अंतिम दौर

लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहीं ख़ालिदा जिया का 30 दिसंबर 2025 को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि BNP ने की। यह खबर ढाका के एक अस्पताल से सामने आई और पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ख़ालिदा जिया के निधन को सिर्फ एक नेता का जाना नहीं, बल्कि “एक राजनीतिक युग का अंत” माना जा रहा है। सम्मान में क्रिकेट लीग के मैच तक रद्द कर दिए गए।
भारत सरकार ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को उनके जनाज़े में शामिल होने के लिए ढाका भेजे जाने की जानकारी सामने आई, जो भारत-बांग्लादेश संबंधों की गंभीरता को दर्शाता है।

BNP में नेतृत्व संकट और आगे की राजनीति

ख़ालिदा जिया के निधन के साथ ही BNP को एक बड़ा नेतृत्व वैक्यूम मिला है। उनके बेटे तारिक रहमान अब पार्टी के शीर्ष नेता के रूप में उभर रहे हैं और 12 फरवरी 2026 को होने वाले अहम चुनावों के लिए संभावित प्रधानमंत्री उम्मीदवार माने जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके निधन से BNP को सहानुभूति वोट मिल सकते हैं, लेकिन पार्टी की पुरानी राजनीतिक ताकत लौटेगी या नहीं, यह आने वाले महीनों में साफ़ होगा।

एक युग का अंत

ख़ालिदा जिया का जीवन बांग्लादेश की राजनीति का आईना रहा—जहां सत्ता भी थी, संघर्ष भी, सम्मान भी और विवाद भी। वे इतिहास में एक ऐसी नेता के रूप में दर्ज होंगी, जिन्होंने दशकों तक देश की राजनीति को आकार दिया और जिनके जाने से बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया।

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