कुत्तों के हमलों से दहशत में शहर, आमजन की सुरक्षा बनी प्रशासन की प्राथमिकता
डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |
विदिशा में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक के बीच प्रशासन द्वारा नसबंदी अभियान अभी भी जारी है। कलेक्टर अंशुल गुप्ता के निर्देशन में जिले में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह अभियान संचालित किया जा रहा है। नगर निकायों और संबंधित विभागों के समन्वय से कुत्तों की वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से नसबंदी कराई जा रही है।
कुत्तों की नसबंदी
अभियान के तहत नसबंदी के बाद कुत्तों का टीकाकरण किया जा रहा है और उन्हें सुरक्षित रूप से उनके क्षेत्र में वापस छोड़ा जा रहा है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अभियान को सतत रूप से चलाया जाए, नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और पशु कल्याण के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आमजन से भी अभियान में सहयोग करने की अपील की गई है।
कुत्तों के हमलों से दहशत में था विदिशा शहर
दरअसल, इस अभियान की पृष्ठभूमि में शहर में फैला वह डर है, जिसने आम लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित कर दिया था। विदिशा शहर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा था। सड़कों पर दिन-रात घूमते झुंड अब आम नागरिकों के लिए खौफ का कारण बन चुके थे। सिर्फ नवम्बर के एक हफ्ते में विदिशा जिला अस्पताल में 91 लोग कुत्तों के हमले का शिकार होकर उपचार के लिए पहुंचे थे , जिनमें स्कूली बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थी। यही कारण था कि डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए नगर पालिका ने कुत्तों की नसबंदी के लिए प्रस्ताव पारित कर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
फिलहाल, प्रशासन का दावा है कि नसबंदी अभियान अभी भी जारी है और आने वाले समय में इसके असर से शहर में आवारा कुत्तों की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

