मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज, ट्रंप के बयान से हलचल

Anchal Sharma
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‘ईरान को आज़ादी दिलाने को अमेरिका तैयार’— ट्रंप के दावे के बाद तेहरान से वॉशिंगटन तक अलर्ट, इस्राइल हाई अलर्ट पर

डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |

मध्य पूर्व एक बार फिर तनाव की आग में घिरता नजर आ रहा है। ईरान की सड़कों पर सरकार के खिलाफ नारे गूंज रहे हैं और इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने हालात को और गंभीर बना दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान को मौजूदा सरकार से “आज़ादी” दिलाने में मदद करने को तैयार है।

ट्रंप का बड़ा बयान

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान पहले से कहीं ज्यादा आज़ादी के करीब है और अमेरिका हर संभव मदद देगा। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठने लगा है कि यह वाकई आज़ादी की बात है या फिर एक नए युद्ध की भूमिका।

ईरानी संसद से कड़ी चेतावनी

ट्रंप के बयान के तुरंत बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। रविवार को ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कालिबाफ ने अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो अमेरिकी सेना और इस्राइल—दोनों को वैध लक्ष्य माना जाएगा।
इस चेतावनी के दौरान ईरानी संसद में हालात तनावपूर्ण हो गए, जब सांसद “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाते हुए मंच तक पहुंच गए।

इस्राइल हाई अलर्ट पर

इसी बीच रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के संभावित हमले की आशंका को देखते हुए इस्राइल को हाई अलर्ट पर रखा गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस्राइली सुरक्षा एजेंसियां ईरान में अमेरिकी कार्रवाई की संभावना मानकर अपनी तैयारियां कर रही हैं।

नेतन्याहू और रुबियो की बातचीत

रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर ईरान को लेकर गंभीर चर्चा हुई। बातचीत का फोकस क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित सैन्य हालात पर रहा।

ग्रीनलैंड को लेकर भी हलचल

तनाव के बीच डेली मेल की एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाला दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना को ग्रीनलैंड पर संभावित हमले की आकस्मिक योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। हालांकि शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने इस योजना का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक और कानूनी रूप से गलत बताया।

वैश्विक असर की आशंका

कुल मिलाकर हालात बेहद संवेदनशील बनते जा रहे हैं। एक ओर ईरान अंदरूनी विरोध से जूझ रहा है, तो दूसरी ओर अमेरिका और इस्राइल पूरी तरह सतर्क और तैयार दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़े, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा—चाहे वह तेल की कीमतें हों या भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्था।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर दुनिया की नजरें टिकी हैं, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े संघर्ष में बदल सकती है।

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