संसद में विधेयक को मंजूरी
भारत के खेल जगत में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक को मंगलवार को राज्यसभा में भी मंजूरी मिल गई। लोकसभा से पास होने के महज एक दिन बाद यह विधेयक ऊपरी सदन से भी पारित हो गया, और अब बस राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी है।
यह सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश के खेल प्रशासन में बदलाव की बयार है — जिसमें पारदर्शिता, सुशासन और खिलाड़ियों को केंद्र में रखने की सोच साफ झलकती है।
- संसद में विधेयक को मंजूरी
- खेल मंत्री का विज़न – “अब नजर पदक पर”
- पी.टी. उषा की राय – “2036 ओलंपिक की तैयारी में मील का पत्थर”
- पद और उम्र पर सख्ती
- राष्ट्रीय खेल बोर्ड – खेल संघों का “सुपर रेगुलेटर”
- खिलाड़ियों के विवाद सुलझाएगा राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण
- निष्पक्ष चुनाव के लिए पैनल
- बीसीसीआई भी देगा जवाब
- सरकार के पास अंतिम अधिकार
- नतीजा: खेल प्रशासन में बड़ा बदलाव
खेल मंत्री का विज़न – “अब नजर पदक पर”
विधेयक पास होने के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा:
“अब समय है कि हम सिर्फ खेल संघों के सुधार पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतने की ठोस रणनीति पर फोकस करें।”
उनके मुताबिक, इस कानून से खेल संघों में पारदर्शिता आएगी, विवादों का समाधान तेज़ होगा और खिलाड़ी खुद फैसलों के केंद्र में होंगे।
पी.टी. उषा की राय – “2036 ओलंपिक की तैयारी में मील का पत्थर”
भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पी.टी. उषा ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा:
“दशकों से चली आ रही सुस्ती अब खत्म होगी। यह सुधार भारत की 2036 ओलंपिक मेज़बानी की तैयारी को और मज़बूत करेगा।”
पद और उम्र पर सख्ती
किसी भी खेल संघ के अध्यक्ष, महासचिव या कोषाध्यक्ष एक ही पद पर लगातार 12 साल से ज्यादा नहीं रह पाएंगे।
उम्र की सीमा 70 साल तय, विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 75 साल।
हर कार्यकारी समिति में कम से कम दो खिलाड़ी और चार महिलाएं अनिवार्य।
राष्ट्रीय खेल बोर्ड – खेल संघों का “सुपर रेगुलेटर”
राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB) सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों को मान्यता देगा या निलंबित करेगा।
इसमें अनुभवी खेल प्रशासक, भारतीय खेल प्राधिकरण के DG, और अर्जुन/खेल रत्न/द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता खिलाड़ी शामिल होंगे।
अगर किसी संघ में चुनावी गड़बड़ी, वित्तीय अनियमितता या ऑडिट रिपोर्ट न देना पाया गया, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकेगी।
खिलाड़ियों के विवाद सुलझाएगा राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण
चयन और चुनाव से जुड़े 350 से ज्यादा विवाद अब राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण में सुलझेंगे।
इसका नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा/सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे।
फैसलों को केवल सुप्रीम कोर्ट में ही चुनौती दी जा सकेगी।
निष्पक्ष चुनाव के लिए पैनल
खेल संघों में चुनाव की पारदर्शिता के लिए राष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल बनेगा।
इसमें निर्वाचन आयोग के पूर्व अधिकारी होंगे, जो पूरी चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
बीसीसीआई भी देगा जवाब
अब बीसीसीआई RTI के तहत आएगा।
भले ही यह सरकारी फंड पर निर्भर न हो, लेकिन 2028 ओलंपिक में क्रिकेट शामिल होने से इसे राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में पंजीकरण कराना होगा।
सरकार के पास अंतिम अधिकार
“भारत” या “राष्ट्रीय” शब्द और राष्ट्रीय प्रतीक इस्तेमाल करने के लिए सरकार से अनुमति जरूरी।
सरकार जनहित में कानून के किसी भी प्रावधान में बदलाव कर सकेगी।
नतीजा: खेल प्रशासन में बड़ा बदलाव
यह विधेयक भारतीय खेल प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और खिलाड़ी-केंद्रित नीति की ओर बड़ा कदम है।
इसके लागू होने के बाद खेल संघों पर कड़ी निगरानी होगी और खिलाड़ियों के अधिकार पहले से ज्यादा मजबूत होंगे।
आने वाले समय में इसका असर भारत के खेल प्रदर्शन और वैश्विक छवि पर साफ दिखने की संभावना है।

